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CG: रतनपुर में गिरा था देवी सती का दाहिना स्कंद, जानें आदिशक्ति मां महामाया देवी मंदिर का इतिहास और मान्यता
Thu, 03 Oct 2024 03:01 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 03 Oct 2024 03:01 PM IST
सार
रतनपुर में देवी सती का दाहिना स्कंद गिरा था, इसलिए रतनपुर शक्तिपीठ के रूप में ख्यात है। भगवान शिव ने स्वयं आविर्भूत होकर उसे कौमारी शक्ति पीठ का नाम दिया था, जिसके कारण मां के दर्शन से कुंवारी कन्याओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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आदिशक्ति मां महामाया देवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित श्री आदिशक्ति मां महामाया देवी मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर, दक्षिण-पूर्व भारत के सबसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मंदिरों में से एक है। रतनपुर एक धार्मिक एवं प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है, जहां अनेकों मंदिर हैं, इसलिए रतनपुर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है।
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रतनपुर को कल्चुरी वंश के शासन काल में छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी भी घोषित किया गया था। उस समय यहां 1200 से भी अधिक तालाब हुआ करते थे, जिसके कारण ही इसे तालाबों का शहर भी कहा जाता था। रतनपुर नगर में अनेक मंदिर हैं, लेकिन यह विशेष रूप से महामाया देवी मां के मंदिर के लिए विख्यात है। आदिशक्ति मां महामाया देवी मंदिर का निर्माण राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा ग्यारहवीं शताब्दी में कराया गया था। मंदिर के भीतर महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी स्वरुप देवी की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
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मान्यता है कि इस मंदिर में यंत्र-मंत्र का केंद्र रहा होगा। रतनपुर में देवी सती का दाहिना स्कंद गिरा था, इसलिए रतनपुर शक्तिपीठ के रूप में ख्यात है। भगवान शिव ने स्वयं आविर्भूत होकर उसे कौमारी शक्ति पीठ का नाम दिया था, जिसके कारण मां के दर्शन से कुंवारी कन्याओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नवरात्रि पर्व पर यहां की छटा दर्शनीय होती है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा यहां 30 हजार से ज्यादा की संख्या में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किये जाते हैं।
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रतनपुर का इतिहास पुरातनता से मिलता है और पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि यह 8वीं शताब्दी ईस्वी तक एक समृद्ध बस्ती थी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित रतनपुर को विभिन्न युगों में कई नामों से जाना जाता था जैसे - मणिपुर, रत्नावली। माना जाता है कि शहर के नाम की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द "रत्न" (रत्न) और "पुर" (शहर) से हुई है। रतनपुर का इतिहास लड़ाइयों और सत्ता परिवर्तन का भी गवाह है। इस क्षेत्र ने नागवंशी और मराठा शासकों सहित विभिन्न राजवंशों का उत्थान और पतन देखा है।