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GPM: राजमेरगढ़ बना खगोल विज्ञान और प्रकृति के संगम का गवाह, ऐसा दिखा आकाशीय नजारा; हुए ब्रह्मांड के दर्शन
Mon, 15 Dec 2025 05:34 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: अनुज कुमार
Updated Mon, 15 Dec 2025 05:34 PM IST
सार
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन और बनमनई इकोकेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पर्यटन स्थल राजमेरगढ़ में रविवार की रात्रि एक भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन खगोल विज्ञान और प्रकृति अन्वेषण का एक अनूठा संगम साबित हुआ
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प्रतिभागियों ने लिया आकाशीय घटनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और खगोल विज्ञान के प्रति लोगों में रुचि जगाने के उद्देश्य से एक अनूठे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन और बनमनई ईकोकेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पर्यटन स्थल राजमेरगढ़ में रविवार की रात्रि “जेमिनिड्स मीटियोर शॉवर (उल्का वृष्टि) स्टार गेज़िंग एडवेंचर” का भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन ने खगोल विज्ञान और प्रकृति अन्वेषण का एक ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया और आकाशीय घटनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कर रोमांचित हुए।
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वर्ष की सबसे सघन खगोलीय घटना
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जेमिनिड्स उल्का वृष्टि रही, जिसे खगोलविदों द्वारा वर्ष की सबसे सघन और आकर्षक उल्का वृष्टि में से एक माना जाता है। इस आयोजन में खगोल विज्ञान के विशेषज्ञ और एमेच्योर एस्ट्रोफोटोग्राफर देवल सिंह बघेल ने प्रतिभागियों को इस खगोलीय घटना की वैज्ञानिक बारीकियों से अवगत कराया।
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उन्होंने विस्तार से समझाया कि जेमिनिड्स उल्का समूह मिथुन (जेमिनी) नक्षत्र की दिशा से आता हुआ प्रतीत होता है। यह उल्का वृष्टि तब होती है जब सौरमंडल में स्थित एक रॉक कॉमेट के टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। जिसे '3200 पायथन' के नाम से जाना जाता है। वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण ये टुकड़े जल उठते हैं और टूटते हुए तारों जैसा अद्भुत दृश्य उत्पन्न करते हैं।
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कड़ाके की ठंड में आकाशीय नजारों का अनुभव
कड़ाके की ठंड के बावजूद, अलाव की गर्माहट के साथ प्रतिभागियों ने रातभर आकाश का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने लगभग 100 से अधिक उल्कापिंडों को गिरते हुए देखा, जिसने सभी उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह अनुभव न केवल रोमांचक था, बल्कि खगोल विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा को भी शांत करने वाला था।
अत्याधुनिक टेलीस्कोप से ब्रह्मांड के दर्शन
उल्का वृष्टि के अलावा, प्रतिभागियों को अत्याधुनिक टेलीस्कोप की मदद से ब्रह्मांड के अन्य अद्भुत नज़ारों का भी अवलोकन कराया गया। उन्होंने बृहस्पति ग्रह और उसके चार सबसे बड़े चंद्रमाओं (गैलीलियन मून) को देखा, जो खगोल विज्ञान में एक महत्वपूर्ण खोज है। इसके अतिरिक्त, शनि के मनमोहक छल्ले, ओरियन नेबुला, प्लेयडीज क्लस्टर, विभिन्न अन्य तारा समूह और सुदूर एंड्रोमेडा गैलेक्सी जैसे खगोलीय पिंडों का भी अवलोकन किया गया। यह अनुभव प्रतिभागियों के लिए खगोलीय पिंडों की विशालता और सुंदरता को समझने का एक अनूठा अवसर था।
देवल सिंह बघेल ने सरल और रोचक भाषा का प्रयोग करते हुए प्रतिभागियों को नक्षत्रों की पहचान, तारों की संरचना, उनके तापमान और आयु, ग्रहों की कक्षाएं व उनकी गति, ध्रुवतारा की सहायता से दिशा का निर्धारण, और हमारी आकाशगंगा की संरचना जैसे जटिल विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उनके व्याख्यानों ने खगोल विज्ञान को आम जनमानस के लिए सुलभ बनाया।