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Chhattisgarh: किसानों को सहकारी समितियों ने जो बीज बांटा, 40-50 फीसदी से भी कम हो रहा उसका अंकुरण; किसान निराश

Fri, 21 Jul 2023 12:05 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 21 Jul 2023 12:05 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ सरकार एवं बीज निगम द्वारा आदिवासी सेवा सहकारी समितियों में किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए उन्नत किस्म के बीज किसानों के लिए बेकार साबित हो रहे हैं, खेतों में रोपा लगाने के पहले किसानों द्वारा तैयार की जाने वाली धान की नर्सरी में यह बीज जम ही नहीं रहे हैं।

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Decreased germination of paddy seeds purchased from cooperatives
Gaurela-Pendra-Marwahi News - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार एवं बीज निगम द्वारा आदिवासी सेवा सहकारी समितियों में किसानों के लिए उपलब्ध कराए गए उन्नत किस्म के बीज किसानों के लिए बेकार साबित हो रहे हैं, खेतों में रोपा लगाने के पहले किसानों द्वारा तैयार की जाने वाली धान की नर्सरी में यह बीज जम ही नहीं रहे हैं। जो भी क्षेत्रों में जम रहे हैं उनका प्रतिशत भी 40 से 50% ही है ऐसे में समय व्यतीत होने के साथ किसानों को खेती में नुकसान होने का डर सता रहा है।

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मानसून की बारिश होने के पहले ही किसान धान की फसल के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर देते हैं। वहीं, बारिश होने के पहले उन्नत किस्म के बीज खरीदते हैं ज्यादातर किसान छत्तीसगढ़ शासन बीज निगम द्वारा सहकारी समितियों में आपूर्ति किए गए उन्नत किस्म के बीजों का ही चयन करते हैं क्योंकि इन बीजों की उत्पादन क्षमता के साथ-साथ रोगों से लड़ने की क्षमता परंपरागत बीजों से अधिक होती है। पर इस बार पेंड्रा मरवाही क्षेत्र में सहकारी समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत किस्म के बीज जिसमें 1010 किस्म का धान शामिल है, जिसे क्षेत्र के लोग बहुतायत में बोते हैं। जब इस बार किसान 1010 किस्म के धान बीज की नर्सरी तैयार करने के लिए उसे खेतों में बोया गया तब इन बीजों का अंकुरण 40 से 50% ही हुआ जबकि कुछ किसानों के खेतों में इसका अंकुरण और भी कम रहा।
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जिसकी वजह से किसान अब दोहरी मार झेलने को विवश हैं क्योंकि जहां एक तरफ उनके द्वारा बोले गए बीज बेकार साबित हो रहे हैं तो वहीं धान बुवाई का समय भी तेजी से बीतता जा रहा है। अब किसान को मजबूरी में अधिक उपजाऊ रोपा पद्धति को छोड़कर सुखी बुआई करना होगा पर इसमें किसानों को धान के उत्पादन का नुकसान तो होगा ही साथ ही खेती के लिए नए बीजों का भी करना पड़ेगा। वही इस पद्धति से धान लगाने पर रोग लगने का खतरा भी अधिक होता है। यही हाल खुले बाजार से खरीदे गए इस किस्म के धान का भी है खुले बाजार से खरीदे गए किसान भी इन बीजों के कम अंकुरण से परेशान हैं।
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धान के अच्छे उत्पादन के लिए किसान अधिक मूल्य पर सहकारी समितियों से उन्नत किस्म के बीज खरीदता है ताकि उसकी फसल रोगमुक्त हो एवं उत्पादन भी अच्छा हो पर इस बार ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, इस पूरे मामले की जानकारी कृषि विभाग के पास भी है उन्होंने कुछ किसानों के बीज का सैंपल भी लिया है। लगभग 80 सैंपल में से 10 सैंपल की रिपोर्ट आई है विभाग का कहना है कि रिपोर्ट पॉजिटिव है पर फिर भी उसे बाकी रिपोर्ट का इंतजार है। पर किसानों को अब जो नुकसान हो रहा है इसकी भरपाई करने के लिए विभाग के पास भी कोई कार्य योजना नहीं है।


छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग एवं बीज निगम की जिम्मेदारी है कि किसानों को उन्नत किस्म के बढ़िया बीज को उपलब्ध कराएं। लेकिन किसान जिस तरह घटिया बीजों को पाकर इस बार परेशान हुए हैं उससे स्पष्ट है कि बीज निगम ने अपना काम कितनी शिद्दत से किया है। अब किसानों को होने वाले नुकसान के संबंध में विभाग एवं सरकार को संज्ञान लेने की आवश्यकता है ताकि किसान इस तरह के नुकसान की भरपाई हो सके।

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