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GPM: आदिम जाति कल्याण विभाग में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप, बड़ी राशि का बंदर बांट, कलेक्टर ने बनाई जांच कमेटी

Wed, 03 Apr 2024 04:57 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 03 Apr 2024 04:57 PM IST
सार

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही में जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में एक बार फिर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, जिसमें भवन के मरम्मत के नाम पर अधिकारी एवं ठेकेदारों ने मिलकर एक बड़ी राशि का बंदर बांट किया है।

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Allegation of major corruption in Tribal Welfare Department huge amount of money distributed in GPM
लीना कमलेश मंडाबी, कलेक्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही में जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में एक बार फिर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, जिसमें भवन के मरम्मत के नाम पर अधिकारी एवं ठेकेदारों ने मिलकर एक बड़ी राशि का बंदर बांट किया है। पूरे मामले की शिकायत भारतीय जनता युवा मोर्चा ने जिला कलेक्टर सहित प्रभारी मंत्री से की है मामले में कलेक्टर ने जांच कमेटी नियुक्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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पूरा मामला जिले के गौरेला पेंड्रा मुख्य मार्ग पर मुख्य पर आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा निर्मित यह खेल परिसर का भवन वर्ष 1998 में निर्मित है निर्माण की गुणवत्ता इतनी मजबूत थी,कि मात्र रंग रोगन से ही भवन चमचमाने लगी परंतु अधिकारी एवं ठेकेदारों ने मिलकर एक करोड़ 18 लाख रुपए की राशि का बंदर बांट किया है,आरोप भारतीय जनता युवा मोर्चा ने दस्तावेजों के साथ लगाया है वही मामले की शिकायत भी जिले के प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से की गई शिकायत के बाद मंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने मामले में जांच कमेटी बना दी है। 
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आदिवासी विकास विभाग भ्रष्टाचार और अनियमितता का पर्याय बन गया है कभी छात्रावास में तो कभी निर्माण कार्यों में, इस बार आदिवासी विकास विभाग में गुरुकुल खेल परिसर में स्थित छात्रावास के मरम्मत के नाम पर 1 करोड़ 18 लाख रुपए का  मरम्मत कार्य कराया गया कांग्रेस शासन काल में निकाले गए स्टैंडर्ड पर ही सवालिया निशान लग गए हैं टेंडर किसी बड़े अखबार ना निकाल कर ऐसे अखबार में निकाला जिसका जिले में ना वितरण होता है मैं ना उसका कोई सर्कुलेशन आश्चर्य की बात यह है कि 1 करोड़ 18 लाख रुपए के काम में सिर्फ पांच निविदा कारों ने ही निविदा प्रस्तुत की जिसमें सिर्फ तीन एनडीए कर ही पात्र पाए गए और सभी काम इन्हीं तीन निविदा में बट गए जिस आदिवासी विकास विभाग में निर्माण और मरम्मत कार्यों की निविदा 20 से 30% काम में होती थी वहीं इस मरम्मत कार्य की निविदा 18 पैसे से लेकर ₹ 1 काम में हुई वही जिस मरम्मत कर का नाम लेकर एक करोड़ 18 लाख रुपए की बिलिंग की बात सामने आ रही है वह पूरा कार्य ही सवालों के घेरे में है। 

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बिल्डिंग में टाइल्स लगाकर दीवारों में रंगी पुताई और दरवाजा में पॉलिश कर एक करोड़ 18 लख रुपए की बिलिंग कर ली गई जबकि दरवाजे खिड़कियां अब भी जर्जर पड़ी हुई है दीवारों में जगह-जगह क्रेक नजर आ रहे हैं पुट्टी उखड़ रही है, भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इस पूरे मामले पर आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त के साथ सभी कर्मचारी जो निविदा प्रक्रिया में शामिल थे पर जांच कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, उनका कहना है कि एक करोड रुपए में तो नहीं बिल्डिंग बनाई जा सकती थी पर यहां सिर्फ कागजी मरम्मत कार्य करके पैसा बुक कर लिया गया युवा मोर्चा इस मामले को सड़क तक लड़ने को तैयार है। 
 

मामले पर जब आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त से बात की गई तो उन्होंने टेंडर प्रक्रिया प्रतिष्ठित अखबारों में विज्ञापन न देने के लिए जनसंपर्क पर ठीकरा फोड़ दिया, वही भ्रष्टाचार होने से इनकार भी किया, मामले में जिला कलेक्टर ने शिकायत आने के बाद संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी बनाकर जांच शुरू करने के आदेश दे दिए हैं वही रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की भी बात की जा रही है। 



निविदा प्रक्रिया को मैनेज कर अपने चाहते ठेकेदारों को काम दिलाने का जिले में यह पहला मामला नहीं है इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं पर आदिवासी जिले में आदिवासी विकास विभाग में इस तरह का भ्रष्टाचार आदिवासियों के साथ एक बड़े चल के रूप में देखा जा रहा है एक करोड रुपए की बड़ी राशि को सिर्फ मरम्मत कार्य में खर्च करना कितना वाजिब है जबकि उतनी राशि से एक पूरी बिल्डिंग खड़ी की जा सकती थी। 

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