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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Devotees bid emotional farewell to Mai Ji: 75-day Bastar Dussehra concludes with the farewell of Mata Maawali

श्रद्धालुओं ने भावुकता के साथ दी 'माई जी' को विदाई: माता मावली विदाई के साथ 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का समापन

Tue, 07 Oct 2025 06:49 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Tue, 07 Oct 2025 06:49 PM IST
सार

बस्तर दशहरा महापर्व का समापन मंगलवार को माता मावली विदाई की रस्म के साथ हुआ। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस अद्वितीय सांस्कृतिक पर्व के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु भावुकता और आस्था के साथ माता मावली की डोली और छत्र को ससम्मान विदा करने जुटे।

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Devotees bid emotional farewell to Mai Ji: 75-day Bastar Dussehra concludes with the farewell of Mata Maawali
माता मावली विदाई के साथ 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का समापन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा महापर्व का समापन मंगलवार को माता मावली विदाई की रस्म के साथ हुआ। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस अद्वितीय सांस्कृतिक पर्व के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु भावुकता और आस्था के साथ माता मावली की डोली और छत्र को ससम्मान विदा करने जुटे।
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दंतेश्वरी मंदिर से पारंपरिक गाजे-बाजे और शोभायात्रा के साथ माता की डोली को जिया डेरा तक ले जाया गया। इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति अध्यक्ष महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, समिति उपाध्यक्ष बलराम मांझी, पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, नाईक-पाईक सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई
दंतेश्वरी मंदिर परिसर में बने आकर्षक मंच पर मावली माता की डोली को रखा गया। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया। बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने परंपरा अनुसार आरती की। इसके बाद पुलिस जवानों ने हर्ष फायर कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राजपरिवार के सदस्यों ने स्वयं डोली को कंधे पर उठाकर जिया डेरा तक ले जाकर परंपरा का निर्वहन किया। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने फूल वर्षा कर जयकारों के बीच माता मावली को भावभीनी विदाई दी।
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परंपरा और श्रद्धा से सजी शोभायात्रा
शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूँज, महिलाओं का कलश धारण कर शामिल होना और कांवर में माता के श्रृंगार सामग्री ले जाते श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने डोली का स्वागत कर पूजा-अर्चना की। जिया डेरा से माता मावली की डोली और छत्र को सुसज्जित वाहन से दंतेवाड़ा के लिए रवाना किया गया।


परंपरा का जीवंत प्रतीक
यह विदाई केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि 600 साल पुरानी बस्तर की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। समापन के साथ ही भक्तों ने देवी से क्षेत्र की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा और अगले वर्ष पुनः इस महापर्व के आगमन की उम्मीद जताई।
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