नक्सल क्षेत्रों में डेयरी उद्योग को बढ़ावा: अनुसूचित वर्ग को मिलेगी दो दुधारु गाय, शाह की मौजूदगी में हुआ MoU
dairy industry in Chhattisgarh: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार को नवा रायपुर स्थित एक रिसार्ट में छत्तीसगढ़ सरकार और नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के बीच दुग्ध मामलों को लेकर एमओयू हुआ।
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dairy industry in Chhattisgarh: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दुग्ध मामलों को लेकर सोमवार को नवा रायपुर स्थित एक रिसार्ट में दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। पहला छत्तीसगढ़ सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए समझौता हुआ। दूसरा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित और राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) के बीच एक और समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।
#WATCH | Raipur: Addressing the MoU signing event of National Cooperative Organics Limited (NCOL) and National Dairy Development Board (NDDB) with the Chhattisgarh Government, Union Home Minister Amit Shah says, "A lot of products started coming in the market claiming to be… pic.twitter.com/KOoe8cPXXf
— ANI (@ANI) December 16, 2024विज्ञापन
इस एमओयू के तहत प्रदेश के ग्रामीण और विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण अंचल में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दिया जायेगा। सहकारिया के माध्यम से लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जायेगा। इस मौके पर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि अभी छत्तीसगढ़ में 621 सहकारी समितियां कार्यरत हैं। एमओयू के बाद अगले 3 साल में 3 हजार 850 गांवों में 3200 नई डेयरी सहकारी समितियां खुलेंगी। इसके साथ ही अनुसूचित वर्ग के लोगों को दो दुधारु गाय दिये जाएंगे। इसके अलावा 6 किलोमीटर में 300 गांव को मिल्क प्रोड्यूसर ऑफ ऑर्गेनाइजेशन से भी जोड़ेंगे। इसका सीधा लाभ सुपोषण अभियान में मिलेगा। दूध की वजह से भोजन में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ जाएगी। प्रदेश के बच्चों और नागरिकों को स्वस्थ और सुपोषण करने में मदद मिलेगी। अनुसूचित जाति (scheduled caste) के वर्ग को दो दुधारु मवेशी दिये जायेंगे।
इस वजह से हुआ एनसीओएल की स्थापना
इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कहा कि "बाजार में बहुत सारे उत्पाद मौजूद हैं, जो जैविक होने का दावा करते थे, लेकिन लोगों को संदेह था। लोग जैविक उत्पादों के लिए अधिक कीमत देने को तैयार हैं, लेकिन उनके प्रमाणीकरण की कोई व्यवस्था नहीं थी। और किसान को भी उचित मूल्य नहीं मिलता था क्योंकि लोगों को यकीन नहीं था कि उत्पाद जैविक हैं या नहीं। ऐसे में जब विश्वास का संकट पैदा हुआ तो हमने एनसीओएल की स्थापना की।
16 जैविक उत्पाद ऑनलाइन उपलब्ध
एनसीओएल का 'भारत' ब्रांड और अमूल का 'अमूल' ब्रांड जैविक खाद्य आपूर्ति कर सकता है। अगले 4 वर्षों में परीक्षण और प्रमाणित जैविक अनाज भारतीय बाजारों में लॉन्च किए जाएंगे। आज की तारीख में 16 जैविक उत्पाद ऑनलाइन उपलब्ध हैं। जब भी आप 'भारत' या 'अमूल' ब्रांड का कोई उत्पाद खरीदते हैं, तो आप आश्वस्त हो सकते हैं कि यह परीक्षण और प्रमाणित है। शाह ने सीएम के सामने ही कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने कह दिया कि हम तीन हजार गांव में सहकारी समितियां ले जाएंगे पर ऐसा नहीं चलेगा। छत्तीसगढ़ के हर गांव के अंदर डेयरी को-ऑपरेटिव बनाना अनिवार्य है। सभी 20 हजार के आस-पास के गांवों में डेयरी को-ऑपरेटिव बनानी ही बनानी है। छत्तीसगढ़ में कूट-कूटकर संसाधन मौजूद हैं। मानव संसाधन समेत हर संसाधन उपलब्ध हैं। कमी केवल व्यस्थापन की है। अगर गांव में सारी समस्याएं ठीक रहे तो कोई भी बंदूक नहीं उठायेगा। हर गांव में डेयरी को-ऑपरेटिव हो और हर किसान इससे जुड़ा होना चाहिये। इससे गांव की तस्वीर बदल जायेगी। इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने गांव का उदाहरण भी दिया।
छत्तीसगढ़ में भरपूर संपदा
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री शाह ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहां कुदरत ने अपनी संपदा को भरपूर मात्रा में बांटा है। यहां न तो पानी की कमी है, न भूमि की और न मेहनतकश लोगों की। आवश्यकता थी केवल एक अच्छी शुरुआत की। आज के इस कार्यक्रम में डेयरी और वन उपज के क्षेत्र में दो नई और सकारात्मक शुरुआत हुई हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया यह समझ चुकी है कि हमारे खानपान में रासायनिक तत्वों की बढ़ती मात्रा के कारण कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और थायरॉइड जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। ऑर्गेनिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण और भूमि की उर्वरता के लिए भी अनुकूल है।
अपने गांव और गुजरात के अनुभवों को किया शेयर
उन्होंने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां देसी गाय के गोबर से ऑर्गेनिक खाद बनाकर 21 एकड़ भूमि पर खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती के माध्यम से हम कृषि को लाभकारी बना सकते हैं और भूमि की उर्वरता को पुनर्जीवित कर सकते हैं। वन उपज के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि आज से जनजातीय समुदाय की वन उपज, जो पहले कौड़ियों के दाम पर बिक जाती थी, अब सर्टिफिकेशन और बेहतर मार्केटिंग के माध्यम से उचित मूल्य पर बेची जाएगी। इससे आदिवासी समुदाय को सशक्त करने और उनकी आय में वृद्धि करने में मदद मिलेगी। उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) की स्थापना को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इसके तहत देशभर में जैविक उत्पादों का परीक्षण और सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार और इन योजनाओं से जुड़े सभी अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कदम प्रदेश को विकास और समृद्धि की दिशा में ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
डेयरी उद्योग को बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के तहत पशुपालन और डेयरी उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इस पहल को ’डबल इंजन सरकार’ के तेजी से काम करने और परिणाम देने की कार्यशैली का उदाहरण बताया। इस समझौते के माध्यम से प्रदेश में तकनीकी उन्नयन, पेशेवर अनुभव और डेयरी उद्योग के विकास में एनडीडीबी की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। डेयरी उद्योग से न केवल रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और प्रदेशवासियों के पोषण स्तर में भी सुधार होगा। दूध उत्पादन के बढ़ने से सुपोषण अभियान को नई दिशा मिलेगी, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और विकास में सहायता मिलेगी।
अगले तीन साल में खुलेंगी 3200 नई समितियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 621 सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इस समझौते के माध्यम से आगामी तीन वर्षों में 3200 नई समितियों की स्थापना के साथ 3850 गांवों को जोड़ा जाएगा। साथ ही, 6 जिलों के 300 गांवों में मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना की जाएगी। दुग्ध संकलन, जो वर्तमान में प्रतिदिन 75,000 किलोलीटर है, अगले तीन वर्षों में 5 लाख किलोलीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, 220 बल्क मिल्क कूलर इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
1.5 लाख पशुपालक होंगे
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सहकारी समितियों से 16,324 पशुपालक जुड़े हुए हैं, जिन्हें निकट भविष्य में बढ़ाकर 1.5 लाख किया जाएगा। इन पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और मशीनों की सहायता से दूध की जांच और तत्काल भुगतान की सुविधा प्रदान की जाएगी। अनुसूचित वर्ग के लोगों को दो दुधारू गाय प्रदान करने की योजना से डेयरी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इन गांवों में बायोगैस और बायो फर्टिलाइजर प्लांट की स्थापना से किसानों की आय में वृद्धि होगी।