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'ओबीसी आरक्षण शून्य करना चाहती थी कांग्रेस': किरण सिंहदेव बोले- अनारक्षित सीटों पर OBC को चुनाव लड़ाएगी बीजेपी
Tue, 14 Jan 2025 06:26 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Tue, 14 Jan 2025 06:26 PM IST
सार
Chhattisgarh Nagriya Nikay Chunav 2025: छत्तीसगढ़ बीजेपी अनारक्षित सीटों पर पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को चुनाव लड़वायेगी। उन्हें प्रतिनिधित्व देगी।
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किरण सिंहदेव भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस लेते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
Chhattisgarh Nagriya Nikay Chunav 2025: छत्तीसगढ़ बीजेपी अनारक्षित सीटों पर पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को चुनाव लड़वायेगी। उन्हें प्रतिनिधित्व देगी। ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आएगी। पहले की तरह स्थिति बहाल रहेगी। ये बातें प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल झूठ की राजनीति करती है। वह बिना मु्द्दे के नगरीय निकाय चुनाव लड़ने जा रही है। वह मुद्दों के अभाव से जूझ रही है। राजनीतिक पतन की तरफ बढ़ रही है,इसलिए केवल वर्ग संघर्ष की बात करना, प्रदेश में माहौल खराब करने का प्रयास करना और षड्यंत्र करना ही कांग्रेस का काम रह गया है।
प्रदेश भाजपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने तो वास्तव में ओबीसी आरक्षण के विरोध में कोर्ट जाने वाले और ओबीसी का आरक्षण रोकने वाले लोगों को पुरस्कृत करने का काम किया है। भाजपा कांग्रेस के सभी षडयंत्र उजागर करती रहेगी और कांग्रेस का झूठ अब चलने वाला नहीं है।
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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आरक्षण के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से ओबीसी विरोधी रही है। साव ने कहा कांग्रेस हमेशा पिछड़ा वर्ग का विरोधी रही है। वह आरक्षण के खिलाफ रही है। तब की कांगेस सरकार की ओर से ‘कालेलकर आयोग’ की अनुशंसा को ठंडे बस्ते में डाल देने के बाद आगे फिर ‘मंडल आयोग’ तक का इंतजार
करना पड़ा। पंडित नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक के आरक्षण विरोधी वक्तव्यों के अनेक संदर्भ आपको गाहे ब गाहे दिख भी जायेंगे। मसलन 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में पंडित नेहरु ने कहा था कि आरक्षण से अक्षमता और दोयम दर्जे का मानक पैदा होता है। इंदिरा गांधी ने मंडल आयोग की संस्तुति से किनारा कर लिया था। राजीव गांधी ने तो यहां तक कह दिया था कि आरक्षण से हम बुद्धुओं को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बार-बार प्रमाणित हुआ है कि कांग्रेस पूरी तरह से
आरक्षण विरोधी है।
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राज्य सरकार ने 16 जुलाई 2024 को छत्तीसगढ़राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया और आयोग ने प्रदेश के पिछड़े वर्ग की वर्तमान सामाजिक, शैक्षणिक तथा आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर सुझाव एवं अनुशंसाए 24 अक्टूबर
2024 को राज्य शासन को प्रस्तुत किया। उक्त प्रतिवेदन में आयोग द्वारा वर्तमान में पंचायत एवं स्थानीय निकायों में आरक्षण की एकमुश्त सीमा 25% को शिथिल कर अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में 50% की सीमा तक आरक्षण का प्रावधान किया जाये। उक्त प्रतिवेदन को मंत्रिपरिषद् द्वारा 28 अक्तूबर 2024 को स्वीकृति प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993, नगर पालिका निगम 1956 एवं नगर पालिका अधिनियम 1961 में सुसंगत धाराओं में संशोधन किया गया। उपरोक्त के अनुसार पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आरक्षण किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के अनुपालन में किये गये आरक्षण में जनसंख्या के अनुपात में किये गये आरक्षण के कारण नगरीय निकाय के आरक्षण में विशेष अंतर नहीं पड़ा, परन्तु ग्रामीण क्षेत्र में 33 में से 16 जिले अधिसूचित जिले है तथा राज्य में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 12.72% है। उस अनुपात में 4 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। इस तरह से कुल 33 में से 20 सीटें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुई, जोकि 50% से अधिक है। इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष का कोई पद आरक्षित नहीं हो पाई है। जबकि जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच, पंच के पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए नियमानुसार पद आरक्षित हुए है। इस प्रकार राज्य सरकार ने जो आरक्षण निर्धारित किया है, वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के नियमानुसार ही है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल झूठ की राजनीति करती है। वह बिना मु्द्दे के नगरीय निकाय चुनाव लड़ने जा रही है। वह मुद्दों के अभाव से जूझ रही है। राजनीतिक पतन की तरफ बढ़ रही है,इसलिए केवल वर्ग संघर्ष की बात करना, प्रदेश में माहौल खराब करने का प्रयास करना और षड्यंत्र करना ही कांग्रेस का काम रह गया है।
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प्रदेश भाजपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने तो वास्तव में ओबीसी आरक्षण के विरोध में कोर्ट जाने वाले और ओबीसी का आरक्षण रोकने वाले लोगों को पुरस्कृत करने का काम किया है। भाजपा कांग्रेस के सभी षडयंत्र उजागर करती रहेगी और कांग्रेस का झूठ अब चलने वाला नहीं है।
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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आरक्षण के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से ओबीसी विरोधी रही है। साव ने कहा कांग्रेस हमेशा पिछड़ा वर्ग का विरोधी रही है। वह आरक्षण के खिलाफ रही है। तब की कांगेस सरकार की ओर से ‘कालेलकर आयोग’ की अनुशंसा को ठंडे बस्ते में डाल देने के बाद आगे फिर ‘मंडल आयोग’ तक का इंतजार
करना पड़ा। पंडित नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक के आरक्षण विरोधी वक्तव्यों के अनेक संदर्भ आपको गाहे ब गाहे दिख भी जायेंगे। मसलन 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में पंडित नेहरु ने कहा था कि आरक्षण से अक्षमता और दोयम दर्जे का मानक पैदा होता है। इंदिरा गांधी ने मंडल आयोग की संस्तुति से किनारा कर लिया था। राजीव गांधी ने तो यहां तक कह दिया था कि आरक्षण से हम बुद्धुओं को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बार-बार प्रमाणित हुआ है कि कांग्रेस पूरी तरह से
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2024 को राज्य शासन को प्रस्तुत किया। उक्त प्रतिवेदन में आयोग द्वारा वर्तमान में पंचायत एवं स्थानीय निकायों में आरक्षण की एकमुश्त सीमा 25% को शिथिल कर अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में 50% की सीमा तक आरक्षण का प्रावधान किया जाये। उक्त प्रतिवेदन को मंत्रिपरिषद् द्वारा 28 अक्तूबर 2024 को स्वीकृति प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993, नगर पालिका निगम 1956 एवं नगर पालिका अधिनियम 1961 में सुसंगत धाराओं में संशोधन किया गया। उपरोक्त के अनुसार पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आरक्षण किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के अनुपालन में किये गये आरक्षण में जनसंख्या के अनुपात में किये गये आरक्षण के कारण नगरीय निकाय के आरक्षण में विशेष अंतर नहीं पड़ा, परन्तु ग्रामीण क्षेत्र में 33 में से 16 जिले अधिसूचित जिले है तथा राज्य में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 12.72% है। उस अनुपात में 4 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हुई है। इस तरह से कुल 33 में से 20 सीटें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुई, जोकि 50% से अधिक है। इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष का कोई पद आरक्षित नहीं हो पाई है। जबकि जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच, पंच के पदों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए नियमानुसार पद आरक्षित हुए है। इस प्रकार राज्य सरकार ने जो आरक्षण निर्धारित किया है, वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के नियमानुसार ही है।