अहम मुलाकात: जीएसटी से हो रहा छत्तीसगढ़ को भारी नुकसान, नक्सल सहित कई समस्याओं को लेकर सीएम बघेल ने की गृहमंत्री शाह से बात
गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में सीएम बघेल ने छत्तीसगढ़ के सात नक्सल प्रभावित जिलों को दिए जाने वाली विशेष सहायता राशि को फिर से शुरू करने की रखी। उन्होंने कहा कि राज्यों को दिया जाने वाला जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद करने पर राज्य की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। नक्सल प्रभावित राज्यों में विकास कार्य के लिए राशि नहीं मिलेगी तो इसका काफी असर पड़ेगा।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनके निवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच जीएसटी प्रणाली से राज्य के संसाधनों पर हुए असर और नक्सल समस्या से जुड़े नीतिगत विषयों के अलावा अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सीएम बघेल ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा बढ़ाने, बस्तर में सीआरपीएफ की दो और बटालियन की तैनाती, बस्तरिया बटालियन के गठन समेत कई मुद्दों को उठाया। सीएम के सुझावों और आग्रह पर केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने गंभीरता पूर्वक विचार कर मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया है। इससे पहले जनवरी 2020 में रायपुर में हुए मध्य क्षेत्रीय परिषद की 22वीं बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मुख्यमंत्री की विस्तृत चर्चा हुई थी। नवंबर 2020 में मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर अमित शाह से मुलाकात की थी।
गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में सीएम बघेल ने छत्तीसगढ़ के सात नक्सल प्रभावित जिलों को दिए जाने वाली विशेष सहायता राशि को फिर से शुरू करने की रखी। उन्होंने कहा कि राज्यों को दिया जाने वाला जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद करने पर राज्य की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। नक्सल प्रभावित राज्यों में विकास कार्य के लिए राशि नहीं मिलेगी तो इसका काफी असर पड़ेगा।
बघेल ने कहा कि बस्तर अंचल में लौह अयस्क प्रचुरता से उपलब्ध है। यदि बस्तर में स्थापित होने वाले स्टील प्लांट्स को 30 प्रतिशत डिस्काउंट पर लौह अयस्क उपलब्ध कराया जाए, तो वहां सैकड़ों करोड़ का निवेश तथा हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के कारण बड़े भाग में अभी तक ग्रिड की बिजली नहीं पहुंच पाई है। सौर ऊर्जा संयंत्रों की बड़ी संख्या में स्थापना से ही आमजन की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति तथा उनका आर्थिक विकास संभव है। मुख्यमंत्री ने वनांचलों में लघु वनोपज, वन औषधियां तथा अनेक प्रकार की उद्यानिकी फसलें के प्रसंस्करण एवं विक्रय की व्यवस्था के लिए कोल्ड चेन निर्मित करने अनुदान दिए जाने का आग्रह किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित जिलों के विकास से जुड़े मुद्दों रखे। उन्होंने आजीविका विकास, नक्सल क्षेत्रों में बैंकों, सड़कें, आधारभूत संरचना के विकास संबंधी मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
पिछले साल अप्रैल में रायपुर आए थे अमित शाह
इसके पहले जनवरी 2020 में रायपुर में हुए मध्य क्षेत्रीय परिषद की 22वीं बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विस्तृत चर्चा हुई थी। इसके बाद नवंबर 2020 में मुख्यमंत्री ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी। अप्रैल-2021 में गृहमंत्री शाह छत्तीसगढ़ आए थे। बीजापुर के नक्सल हिंसा में सीआरपीएफ के 23 जवान शहीद हुए थे। बीजापुर में गृह मंत्री जवानों से मिले थे। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य सरकार, केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की थी।
बघेल ने पीएम को लिखा पत्र
इस बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों के विकास के प्रचलित मापदंडों में सांस्कृतिक उत्थान के तत्वों को भी शामिल किए जाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम (टीएडीपी) के मॉनिटरिंग इंडिकेटर में स्थानीय बोली में शिक्षा, मलेरिया व एनीमिया में कमी, वनोपज की समर्थन मूल्य में खरीदी, लोक कला, लोक नृत्य तथा पुरातत्व का संरक्षण-संवर्धन, जैविक खेती, वनाधिकार पट्टे आदि को शामिल किया जाना चाहिए। सीएम बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कहा है - मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इन सभी मापदंडों पर छत्तीसगढ़ ने शानदार काम किया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने लिखा है - हमारे राज्य में कुल 10 आकांक्षी जिले हैं, जिसमें पूर्णतः 8 जिले अनुसूचित क्षेत्र में हैं एवं 07 जिले बस्तर संभाग से हैं जो अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र भी है और वामपंथी उग्रवाद से ग्रस्त हैं। इन आकांक्षी जिलों के विकास को लेकर नीति आयोग द्वारा समय-समय पर समीक्षा एवं मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न मापदंड के आधार पर आकांक्षी जिलों के बीच श्रेणीकरण किया जाता है।
हमारे वनांचल तथा ग्राम्य जीवन में संस्कृति और परंपराओं का विशेष योगदान होता है, जिससे वहां के लोगों के जीवन में समरसता, उत्साह एवं स्वावलम्बन का भाव रहे, इसलिए आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान के बिन्दु को भी यथोचित महत्व एवं ध्यान दिया जाना चाहिए। उपरोक्त इंडीकेटर्स को भी जोड़े जाने पर मुझे विश्वास है कि आकांक्षी जिलों के बहुमुखी विकास में किये जा रहे सभी प्रयासों पर भी ध्यान रहेगा और जिस आशा के साथ यह आकांक्षी जिलों की पृथक मॉनिटरिंग व्यवस्था शुरू की गई है वह भी सफल होगी।