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Chhattisgarh : NMDC की जनसुनवाई का विरोध, पारंपरिक हथियार लेकर पहुंचे आदिवासी बोले-जल-जंगल बर्बाद कर दिया

Mon, 07 Nov 2022 01:59 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दंतेवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दंतेवाड़ा Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Mon, 07 Nov 2022 01:59 PM IST
सार

आदिवासी नेता सोनी सोरी ने बताया कि NMDC 60 सालों से लौह अयस्क  का दोहन कर पेड़-पौधों को काट कर रही है।  इसके एवज में NMDC से प्रभावित गांवों को कुछ नहीं दिया जा रहा है। प्रभावित गांवों  की संख्या 50 से ज्यादा है, लेकिन जनसुनवाई में सात गांव के लोगों को ही क्यों बुलाया गया ? 

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chhattisgarh tribals protest against NMDC's public hearing in dantewada
दंतेवाड़ा में NMDC की जनसुनवाई का विरोध करते आदिवासी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में NMDC (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की जनसुनवाई का ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध कर दिया। पारंपरिक हथियार लेकर पहुंचे आदिवासियों ने विद्यानगर चौक पर सड़क जाम कर दी और राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आदिवासियों का कहना था कि जल और जंगल को बर्बाद कर दिया है। नदियां प्रदूषित हो गई हैं, जिसका पानी पीकर मवेशी मर रहे हैं और ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। इसके बाद प्रशासन और प्रबंधन की टीम बैरंग लौट गई।

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बैलाडीला के डिपॉजिट 14 की क्षमता का करना है विस्तारीकरण
जानकारी के मुताबिक, बैलाडीला के डिपॉजिट 14 की क्षमता के विस्तारीकरण के लिए सोमवार को प्रशासन और NMDC ने जनसुनवाई का आयोजन किया था। इस जनसुनवाई का सयुंक्त पंचायत जनसंघर्ष समिति ने विरोध कर दिया। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी किरंदुल के विद्यानगर चौक पर एकत्र हो गए। हाथों में तीर-धनुष और अन्य पारंपरिक हथियार लिए इन ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया। आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन के चलते एक भी ग्रामीण नहीं पहुंच सका। 
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आदिवासियों का आरोप पर्यावरण की शर्तों का पालन नहीं
विरोध प्रदर्शन में 28 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए थे। आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि NMDC जो कि पिछले 60 सालों से बैलाडीला में लौह उत्खनन का कार्य कर रही है, उस कंपनी ने कभी भी पर्यावरण स्वीकृति में निहित शर्तो का पालन नही किया है। उन्होंने कहा कि लौह उत्खनन से निकलने वाले लाल पानी से जिले के कई नदियां  प्रदूषित हो चुकी है, दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत विलुप्त हो चुके हैं। हजारों एकड़ जमीन बंजर हो गई और लाखों  पेड़ नष्ट हो चुके हैं।
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नदी-नाले प्रदूषित हो रहे
आदिवासी नेता सोनी सोरी ने बताया कि NMDC 60 सालों से लौह अयस्क  का दोहन कर पेड़-पौधों को काट कर रही है।  इसके एवज में NMDC से प्रभावित गांवों को कुछ नहीं दिया जा रहा है। प्रभावित गांवों  की संख्या 50 से ज्यादा है, लेकिन जनसुनवाई में सात गांव के लोगों को ही क्यों बुलाया गया ? आरोप लगाया कि NMDC की वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।  नदी-नालों का पानी दूषित हो रहा है और पेड़ों को काटकर प्लांटेशन नहीं किया जा रहा है।

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