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छत्तीसगढ़ में 'इम्प्रूव्ड राइस स्कीम' होगी शुरू: मिलों के आधुनिकीकरण और गुणवत्ता सुधार पर सरकार का जोर
Thu, 28 May 2026 04:48 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 28 May 2026 04:48 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नई ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें खाद्य विभाग, भारतीय खाद्य निगम, मार्कफेड और राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नई ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें खाद्य विभाग, भारतीय खाद्य निगम, मार्कफेड और राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की। उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से इस योजना को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए राज्य की राइस मिलों को तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार तकनीकी रूप से उन्नत बनाना जरूरी होगा।
बैठक में ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ के तहत गुणवत्ता मानकों, भंडारण व्यवस्था, अनुबंध प्रक्रिया, लागत और क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल और 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के निर्धारित मानकों की जानकारी भी दी।
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राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक में कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, एफसीआई में रैक मूवमेंट तेज करने और मिलिंग लागत बढ़ने जैसे मुद्दों को उठाया। साथ ही योजना के सफल संचालन के लिए तकनीकी और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की। कार्यशाला में राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कान्तिलाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल, कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल सहित प्रदेशभर के 60 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने योजना के सफल क्रियान्वयन में सहयोग का भरोसा जताया।
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कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की। उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से इस योजना को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए राज्य की राइस मिलों को तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार तकनीकी रूप से उन्नत बनाना जरूरी होगा।
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बैठक में ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ के तहत गुणवत्ता मानकों, भंडारण व्यवस्था, अनुबंध प्रक्रिया, लागत और क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल और 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के निर्धारित मानकों की जानकारी भी दी।
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राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक में कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, एफसीआई में रैक मूवमेंट तेज करने और मिलिंग लागत बढ़ने जैसे मुद्दों को उठाया। साथ ही योजना के सफल संचालन के लिए तकनीकी और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की। कार्यशाला में राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कान्तिलाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल, कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल सहित प्रदेशभर के 60 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने योजना के सफल क्रियान्वयन में सहयोग का भरोसा जताया।