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CG News: पीएम मोदी के प्रयास ने बदली दिव्यांग अंजन की तकदीर; जब पैदा हुए तो दादा ने कहा था- ये क्या कर लेगा
Sun, 05 Jan 2025 03:03 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sun, 05 Jan 2025 03:03 PM IST
सार
Chhattisgarh News, Anjan: एक दशक पहले अपने दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिव्यांग बच्चों के संस्थान 'सक्षम' के एक छोटे से दृष्टिबाधित बच्चे की प्रतिभा से मुग्ध हो गए थे। उस बच्चे का नाम था अंजन। जब अंजन ने अपना गाना सुनाया तब प्रधानमंत्री जी इतने खुश हुए थे कि उन्होंने बड़े ही स्नेहिल भाव से उसके सर पर हाथ फेरकर उसे प्रोत्साहित किया था।
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दिव्यांग अंजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
Chhattisgarh News, Anjan: एक दशक पहले अपने दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिव्यांग बच्चों के संस्थान 'सक्षम' के एक छोटे से दृष्टिबाधित बच्चे की प्रतिभा से मुग्ध हो गए थे। उस बच्चे का नाम था अंजन। जब अंजन ने अपना गाना सुनाया तब प्रधानमंत्री जी इतने खुश हुए थे कि उन्होंने बड़े ही स्नेहिल भाव से उसके सर पर हाथ फेरकर उसे प्रोत्साहित किया था।
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देश के प्रधानमंत्री का प्रोत्साहन एक बच्चे के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, अंजन इसका उदाहरण है। पहले अंजन दूसरों के लिखे गीत गाता था, आज अंजन स्वयं गीत लिखता है, इसे कंपोज भी करता है और गाता भी है। अभी हाल ही में अंजन ने अयोध्या धाम में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने पर एक गीत लिखा और उसे कंपोज भी किया है।
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अंजन की संगीत में रुचि को देखते हुए संस्थान में उसे आर्गन, कांगो और ढोलक का प्रशिक्षण दिया गया।
दंतेवाड़ा में हर साल बारसूर महोत्सव का आयोजन होता है। इस बार के आयोजन में अंजन अपने रामलला पर लिखे गीत की प्रस्तुति देगा। अंजन अभी 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है। अब इस संस्थान में दसवीं तक की पढ़ाई संस्थान के भीतर ही होती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संस्थान में सभी बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। सक्षम संस्था में शैक्षणिक व्यवस्था डीएमएफ के माध्यम से होती है। उनका यह मानना था कि खनन प्रभावित इलाकों में विकास के कार्यों के लिए डीएमएफ के माध्यम से निधि स्थापित की जाए। आज अंजन जैसे बच्चों का सपना डीएमएफ के माध्यम से पूरा हो रहा है।
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जब पैदा हुआ तो दादाजी ने कहा, यह क्या करेगा इसको कहीं छोड़ दो
अंजन बीजापुर के अंदरूनी नक्सल प्रभावित इलाके का रहने वाला है। नक्सल समस्या की वजह से माता-पिता को गांव छोड़ना पड़ा। अंजन बचपन से ही दृष्टिबाधित है। जब वह पैदा हुआ तो उसके दादाजी को बड़ी निराशा हुई और उन्होंने कहा कि इसका क्या होगा? यह क्या करेगा? इसको छोड़ दो। मां बहुत प्यार करती थी। मां ने कहा कि नहीं इसे पालेंगे। बाद में सक्षम संस्था के बारे में पता चला और सक्षम में एडमिशन दिलाया। सक्षम के टीचरों को इसके गायन की प्रतिभा और संगीत में रुचि के बारे में पता चला और अब अंजन की दुनिया ही बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी अंजन की प्रतिभा से प्रभावित हो चुके हैं।
गहरी प्रतिभा और अथाह उत्साह से सबको मिलती है प्रेरणा
अंजन ने आज सब बच्चों के साथ लुई ब्रेल को पुष्पांजलि दी। लुई ब्रेल ऐसे व्यक्ति है जिनकी वजह से दृष्टिबाधित बच्चे भी फर्राटे से पढ़ सकते हैं। सक्षम कैंपस में हेलेन केलर की तस्वीर भी है, जो यह बताती है कि दुनिया की सबसे अच्छी चीजों को ना देख सकते हैं न छू सकते हैं, उन्हें केवल महसूस कर सकते हैं।