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Chhattisgarh: दुल्हन को विदा कराकर बैलगाड़ी से लौटा दूल्हा, परिजन बोले- प्राचीन परंपरा आज के युवा भूले
Sun, 12 Feb 2023 05:48 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Sun, 12 Feb 2023 05:48 PM IST
सार
21वीं सदी और आधुनिक जमाने में जहां पर वातानुकूलित बंद गाड़ियों में दूल्हा दुल्हन को ले जाया जाता है। वहीं प्राचीन परंपरा की झलक जब लोगों ने देखी तो ठहर गए। देखते ही देखते यहां पर सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई। परिवार वालों के साथ साथ अन्य राहगीर भी रुक कर इस अनोखे दूल्हा दुल्हन के स्वागत को देखने के लिए खड़े हो गए।
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बैलगाड़ी से दुल्हन को विदा कराकर लौटता दूल्हा।
- फोटो : संवाद
विस्तार
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में दूल्हा और दुल्हन का स्वागत रविवार को अनोखे ढंग से किया गया। जिसने भी इस स्वागत कार्यक्रम को देखा उन्होंने उस लम्हे को अपने कैमरे में कैद कर लिया। दरअसल जिले के ग्राम पाकुरभाट में किशन यादव ने शादी के बाद अपनी नई दुल्हन दुर्गा यादव को बैलगाड़ी से विदा कराकर गृहग्राम लौटा। परिवार वालों ने भी उनका स्वागत कर पूरे चौक में कराया। परिजनों ने कहा कि आज के युवा अपनी प्राचीन परंपरा को भूल रहे हैं। यह सब उनको याद दिलाने के लिए है।
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ग्रामीणों ने बताया कि गांव के धनुष यादव के यहां उसके पुत्र किशन यादव की बारात गांव पाकुरभाट से बेल्हारी गई हुई थी जहां पर। किशन यादव ने वहां से दुर्गा यादव को ब्याह कर अपने गांव लाया, जहां उनके परिवार वालों ने प्राचीन परंपरा के अनुसार बैलगाड़ी से उनका स्वागत किया और उन्हीं में सवारी कर उन्हें गांव भ्रमण कराते हुए घर ले गए।
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सजाई गई बैलगाड़ी
आज दूल्हा दुल्हन को घर तक ले जाने के लिए उनके परिवार वालों ने पूरी व्यवस्था की हुई थी। यहां पर बैलगाड़ी और बैल को भी सजाया गया था। सजाई हुई इस बैलगाड़ी में दूल्हा-दुल्हन को बैठाया गया और साथ में कुछ बच्चे भी उसमें बैठे जिसके बाद पूरा परिवार उन्हें बाजे गाजे के साथ स्वागत करके अपने घर ले गए।
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दिखनी चाहिए झलक
दूल्हे के पिता धनुष यादव ने बताया कि प्राचीन परंपरा की झलक दिखनी चाहिए। हमारे बाप दादा हम स्वयं बैलगाड़ी में बारात गए हुए थे। आज की युवा पीढ़ी इन सब बातों को भूल गई है। हमने छोटा सा प्रयास किया है और काफी अच्छा लगा कि लोगों ने इसकी तारीफ की। बच्चे पूछ रहे थे कि आखिर बैलगाड़ी में दूल्हा-दुल्हन को क्यों ले जाया जा रहा है। तब हम ने बताया कि हम तो पूरा बारात बैलगाड़ी में गए थे। उसी में खाने पीने का सामान रखकर आराम से बारात निकलती थी।