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छत्तीसगढ़ः भूपेश बघेल, टीएस सिंह देव नहीं, ये चेहरा होगा मुख्यमंत्री!

Wed, 12 Dec 2018 05:22 PM IST
Updated Wed, 12 Dec 2018 05:22 PM IST
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chhattisgarh election 2018: chief minister face in chhattisgarh
प्रतीकात्मक तस्वीर
छत्तीसगढ़ में 15 साल का वनवास खत्म करते हुए कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली है। विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक समीकरणों को तोड़ते हुए कांग्रेस ने अपने 68 विधायकों को विधानसभा तक पहुंचा दिया है, वहीं भाजपा के हिस्से में 15 सीटें बची हैं। कांग्रेस ने चुनाव में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने नाम कर ली है। फिलहाल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए ‘एक अनार, सौ बीमार’ वाले हालात बने हुए हैं।
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मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर फैसले के लिए कांग्रेस के विधायक दल की बैठक आज (बुधवार) रात आठ बजे होनी है जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया मौजूद रहेंगे।
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मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भूपेश बघेल के साथ विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता टीएस सिंह देव, पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू का नाम भी शामिल है। भले ही भूपेश बघेल का नाम शीर्ष पर हो लेकिन ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। आइए आपको बताते हैं कि क्यों ताम्रध्वज साहू इस रेस में सबसे आगे हैं।
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दरअसल कांग्रेस का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में जीत हासिल करके 2019 का लोकसभा चुनाव है। साल 2013 में दरभा घाटी में नक्सलियों के हमले में कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व समाप्त हो गया था। ऐसे में कांग्रेस को ऐसे नेता की तलाश थी जो सूबे में जनाधार खड़ा कर सके। ओबीसी समुदाय से आने वाले भूपेश बघेल को कांग्रेस ने सूबे की जिम्मेदारी तो सौंप दी, लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं में वो अंदरखाने स्वीकार्य नहीं किए जा सके।

इस बार दुर्ग ग्रामीण से सांसद ताम्रध्वज साहू को विधानसभा चुनाव लड़ाकर कांग्रेस ने संकेत दे दिए थे कि वो सूबे के नेताओं की आपसी कलह से उबरना चाहती है। कांग्रेस को सूबे में अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए एक सौम्य, साफ, सरल छवि और अनुभवी नेता की जरूरत थी, जिस पर ताम्रध्वज खरे उतरे। भूपेश बघेल पहले ही सीडी कांड से जूझ रहे हैं। ये ताम्रध्वज ही थे जो 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की आंधी में पैर जमाकर खड़े रहे और दुर्ग ग्रामीण सीट जीतने में कामयाब रहे थे। 

 

chhattisgarh election 2018: chief minister face in chhattisgarh
प्रतीकात्मक तस्वीर
ताम्रध्वज साहू को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे का भी बेदह करीबी माना जाता है। साथ ही विधानसभा चुनाव में बंपर जीत में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाने वाले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया से भी ताम्रध्वज के रिश्ते करीबी हैं, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवारों की तीसरी और आखिरी सूची जारी होने से पहले पीएल पुनिया के साथ भूपेश बघेल के विवाद की भी खबरें आईं। 

इस चुनाव में अपनी संसदीय क्षेत्र दुर्ग जिले की छह में से पांच सीटें जिताकर ताम्रध्वज ने साबित कर दिया कि उनकी पकड़ जमीनी स्तर पर दूसरे नेताओं से कहीं ज्यादा है। साहू प्रदेश में कांग्रेस की ओबीसी यूनिट के अध्यक्ष भी हैं। कांग्रेस को ऐसा लगता है कि साहू 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को फायदा पहुंचा सकते हैं। सूबे में करीब 47-48 प्रतिशत ओबीसी जनसंख्या है, जिसमें साहू समाज की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत है। साथ ही ताम्रध्वज की पकड़ अपने साहू समाज के साथ-साथ आदिवासी समुदाय में भी अच्छी मानी जाती है। 
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