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CG: 6वीं से 12वीं तक के छात्र पढ़ेंगे छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठ

Mon, 24 Aug 2026 10:19 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Mon, 24 Aug 2026 10:19 PM IST
सार

CG Education News: छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग में लगातार बदलाव का दौर चल रहा है। इस क्रम में फिर एक अहम बदलाव किया जा रहा है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्र अब स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे।

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CG: classes 6 to 12 Students will study lessons on Chhattisgarh art and culture
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

CG Education News: छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग में लगातार बदलाव का दौर चल रहा है। इस क्रम में फिर एक अहम बदलाव किया जा रहा है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्र अब स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे। बच्चे अपनी माटी और संस्कृति से रू-ब-रू होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए प्रयास किया जा रहा है। 

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राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्रदेश की कला  एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ शिरकत करेंगे। कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।
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स्थानीय कला-संस्कृति को जोड़ने की पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।
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100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों की ओर से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।

विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश
आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

वहीं स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है।  पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।

पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।

लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।

तीन दिनों में पाठ्य सामग्री से लेकर लघु फिल्म की पटकथा तक
कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।


नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ेगी आर्ट रिपोजिटरी
छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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