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छत्तीसगढ़ः राजनीतिक नूराकुश्ती में मजाक बना सुप्रीम कोर्ट का आदेश

Mon, 04 Jul 2016 05:21 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Jul 2016 05:21 PM IST
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Chhatisgarh: Hanuman temple of Raipur could not demolish
hanuman temple raipur - फोटो : indian express

छत्तीसगढ़ के रायपुर में महादेव घाट स्थित हनुमान मंदिर राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन कर रह गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जहां मंदिर तोड़ने के आदेश दिए हैं वहीं भाजपा समेत कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। 

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रविवार को जब नगर निगम की टीम मंदिर तोड़ने के लिए पहुंची तो भाजपा, बजरंग दल, विहिप और शिवसेना नेताओं के नेतृत्व में काफी संख्या में पहुंचे लोगों ने इसका विरोध किया। घंटों चले हंगामे के बीच निगम की टीम को बैरंग लौटना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश मजाक बनकर रह गए। खास बात ये है कि मंदिर विधानसभा अध्यक्ष के ट्रस्ट के नाम आवंटित भूमि पर बना है। 
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बता दें कि शहर के महादेव घाट पर बने मंदिर को 15 मई को दिए आदेशों में सुप्रीम कोर्ट अवैध घोषित करते हुए इसे तोड़ने के आदेश दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार के उस हलफनामे के बाद दिए थे जिसमें उसने माना था कि मंदिर और वहां बनी 19 दुकानों का निर्माण अवैध तरीके से हुआ है। 
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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए। लेकिन इस सारे विवाद में सबसे बड़ा पेंच ये बना हुआ है कि मंदिर जिस जमीन पर बना है वो विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल के ट्रस्‍अ छगन लाल गोविंद राम ट्रस्ट को लीज पर दी गई है। 

मंदिर निर्माण के बाद हुई मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा में मुख्यमंत्री रमन सिंह भी शामिल हुए थे। ऐसे में उसी मंदिर को तोड़ना सरकारी अमले के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। लेकिन मजबूरी ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है। 

Chhatisgarh: Hanuman temple of Raipur could not demolish

इसी मजबूरी में रविवार को नगर निगम का दस्ता मंदिर गिराने के लिए पहुंचा तो भाजपा, शिवसेना और बजरंग दल समेत तमाम हिंदूवादी संगठनों के लोग वहां जमा हो गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान कांग्रेस के लोग भी वहां मौजूद रहे। 

उन्होंने इस समस्या के लिए भाजपा को दोषी ठहराते हुए कहा कि भाजपा ने साम्प्रदायिक माहौल खराब करने के लिए ये सारा खेल रचा। हालांकि मंदिर तोड़ने का उन्होंने भी विरोध किया। मंदिर का यह मुद्दा फिलहाल राज्य में खासा विवादित बना हुआ है। राजनीतिक दलों को भी इसमें अच्छा खासा मसाला दिख रहा है। 

कांग्रेस बेशक मंदिर तोड़ने का विरोध कर रही है लेकिन कुछ दिन पहले उसने विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग भी कर दी थी।

दूसरी ओर रायपुर के जिलाधिकारी ओपी चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निगम की टीम जल्द ही मंदिर तोड़ने के लिए जाएगी। फिलहाल हमने कानून व्यवस्‍था को देखते हुए मंदिर का ध्वस्तीकरण रोक दिया है। जल्द ही इस पर कार्रवाई होगी।

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