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Raipur: सूर्य उपासना का महापर्व; चैती छठ पर सुहागिनों ने दिया डूबते सूर्य को अर्घ्य, लगे जय छठी मैया के जयकारे
Mon, 27 Mar 2023 11:46 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Mon, 27 Mar 2023 11:46 PM IST
सार
सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ पूजा आज सोमवार को राजधानी रायपुर में की गई। उत्तर भारतीय समाज की महिलाओं ने आज चैत्र छठ महापर्व और चैत्र नवरात्रि मनाई। रायपुर के व्यास तालाब बीरगांव में सुहागिन महिलाओं ने 36 घंटे का व्रत रखकर चैती छठी मइया की पूजा अर्चना की।
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रायपुर के व्यास तालाब में छठ पर्व मनाया गया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ पूजा आज सोमवार को राजधानी रायपुर में की गई। उत्तर भारतीय समाज की महिलाओं ने आज चैत्र छठ महापर्व और चैत्र नवरात्रि मनाई। रायपुर के व्यास तालाब बीरगांव में सुहागिन महिलाओं ने 36 घंटे का व्रत रखकर चैती छठी मइया की पूजा अर्चना की। व्रती महिलाओं ने घाट पर डूबते सूर्य कोअर्घ्य देकर छठी मइया से अपने परिवार और प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। कल 28 मार्च को सुबह में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा।
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रायपुर में पहली बार करणी सेना परिवार छत्तीसगढ़ के बैनर तले चैत्र छठ महापर्व और चैत्र नवरात्रि मनाई गई। करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि शाम को छठी मैया और दुर्गा मैया की भव्य आरती की गई। वैदिक मंत्रों के बीच पूरा घाट छठमैया के जयकारे से गूंज उठा। कल सुबह 9 बजे से शाम तक घाट पर महाभंडारे का आयोजन किया गया है। जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद बांट जाएगा।
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बड़ी संख्या में घाट पर पहुंची सुहागिन व्रती महिलाएं
शाम 4 बजे व्यास तालाब पर बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय समाज की सुहागिन व्रती महिलाएं पहुंची। इस दौरान छठ मैया की गीत से पूरा घाट गूंज उठा। अपने-अपने परिवार की व्रती महिलाओं को परिजनों और पंडितों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिए। इस दौरान देर रात तक सांस्कृतिक भजनों की बयार बहती रही। मुम्बई के सुप्रसिद्ध भजन गायक और गायिका अमर रघुवंशी, अंकिता दुबे, रायपुर के भजन सम्राट लल्लू महाराज और छत्तीसगढ़ी गायक रवि गोस्वामी भजनों से समां बांध दिया। लोग छठ मइया की गीत पर थिरकते रहे। जय छठ मइया के जयकारे लगते रहे।
नहाय-खाय के साथ होती है चैती छठ की शुरुआत
चार दिनों तक चलने वाले इस चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचल भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर चैती छठ पर्व का समापन होगा। छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
व्रती महिलाएं तालाब या नदी में पानी के अंदर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। छठ पूजा के लिए दउरा में ठेकुआ, पूवा, खजूर, फूल, फल, चावल के लड्डू, कंदमूल, मूली, गन्ना आदि चीजें रहती हैं।
साल में दो बार मनता है छठ पर्व
नवरात्रि की तरह ही छठ पूजा भी साल में दो बार मनाया जाता है। इस क्रम में पहला चैती छठ और दूसरा कार्तिक मास की छठ मनाई जाती है। कार्तिक महीने की तरह चैती छठ भी पूरे देशभर में उत्तर भारतीय समाज धूमधाम से मनाता है।
भगवान श्रीराम ने की थी छठ पूजा
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक चैती छठ की परंपरा भगवान श्रीराम ने शुरू की थी। जब उनका राज्याभिषेक हो रहा था, तब भगवान राम ने माता-सीता के साथ अपने कुलदेवता भगवान सूर्य की पूजा अर्चना कर और सरयू नदी में अर्घ्य दिया था।