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सीजीपीएससी भर्ती घोटाला: पूर्व सीएम बघेल के ओएसडी रहे बोरघरिया के खाते में जमा मिले 66.64 लाख रुपये
Tue, 15 Sep 2026 01:18 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 15 Sep 2026 01:18 PM IST
सार
सीजीपीएससी भर्ती घोटाला मामले में ईडी की जांच में बड़ा वित्तीय खुलासा हुआ है। एजेंसी के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के तत्कालीन ओएसडी और बलरामपुर के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 लेन-देन के जरिए 66.64 लाख रुपये नकद जमा किए गए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का दावा है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में तैनात अतिरिक्त कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 लेन-देन के जरिये 66.64 लाख रुपये नकद जमा किए गए थे।
जांच के अनुसार, सीजीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा 2021 के दौरान उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को पास कराने और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर तीन करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि जुटाई। इस काम के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात ओएसडी चेतन बोरघरिया के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।
जब्त डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वित्तीय लेन-देन, भुगतान की मांग और रकम वापसी से जुड़ी बातचीत सामने आई है। इसके अलावा मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्रा. लि. के जरिये रकम को घुमाने और उसकी परतबंदी करने का भी संदेह है।
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प्रश्नपत्र लीक और कोचिंग की साजिश
ईडी की पड़ताल में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर स्थित सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उम्मीदवारों को बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नों के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई। अपराध से अर्जित संपत्ति को हासिल करने, कब्जे में रखने, छिपाने और इस्तेमाल करने में संलिप्तता पाए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत 11 सितंबर को गिरफ्तार किया।
2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। इसमें योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के नजदीकी लोगों का चयन डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर करने का आरोप है। राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई भी इस मामले की समानांतर जांच कर रही है। सीबीआई ने इससे पहले सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, एक निजी व्यक्ति और चार चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया था। ईडी ने भी वसूली सिंडिकेट की पड़ताल के तहत करीब 30 लोगों को नोटिस जारी किया है, जिनमें विवादित अभ्यर्थी, गैर-सरकारी संगठन, रिसॉर्ट संचालक और बड़ी कंपनी से जुड़े लोग शामिल हैं।
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जांच के अनुसार, सीजीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा 2021 के दौरान उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को पास कराने और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर तीन करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि जुटाई। इस काम के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात ओएसडी चेतन बोरघरिया के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।
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जब्त डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वित्तीय लेन-देन, भुगतान की मांग और रकम वापसी से जुड़ी बातचीत सामने आई है। इसके अलावा मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्रा. लि. के जरिये रकम को घुमाने और उसकी परतबंदी करने का भी संदेह है।
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प्रश्नपत्र लीक और कोचिंग की साजिश
ईडी की पड़ताल में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर स्थित सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उम्मीदवारों को बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नों के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई। अपराध से अर्जित संपत्ति को हासिल करने, कब्जे में रखने, छिपाने और इस्तेमाल करने में संलिप्तता पाए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत 11 सितंबर को गिरफ्तार किया।
2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। इसमें योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के नजदीकी लोगों का चयन डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर करने का आरोप है। राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई भी इस मामले की समानांतर जांच कर रही है। सीबीआई ने इससे पहले सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, एक निजी व्यक्ति और चार चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया था। ईडी ने भी वसूली सिंडिकेट की पड़ताल के तहत करीब 30 लोगों को नोटिस जारी किया है, जिनमें विवादित अभ्यर्थी, गैर-सरकारी संगठन, रिसॉर्ट संचालक और बड़ी कंपनी से जुड़े लोग शामिल हैं।