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छत्तीसगढ़ में सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा: मुख्य आरोपी डॉक्टर दो महीने से फरार, 40 पोस्टमार्टम रिपोर्ट अटकीं

Tue, 15 Sep 2026 03:02 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 15 Sep 2026 03:02 PM IST
सार

सिम्स में सामने आए सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े ने अब पुलिस जांच के साथ-साथ कई परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। मामले का मुख्य आरोपी फॉरेंसिक विभाग का डॉक्टर डॉ. एसएन गोले करीब दो महीने से फरार बताया जा रहा है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है।

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cg snakebite compensation scam: Main accused doctor absconding for two months, 40 post-mortem reports pending
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सिम्स में सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी फॉरेंसिक विभाग के डॉ. एसएन गोले करीब दो महीने से फरार हैं। पुलिस आरोपी डॉक्टर की लगातार तलाश कर रही है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है। उनके गायब होने से संस्थान में उनके द्वारा की गई करीब 40 मामलों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पूरी तरह अटक गई हैं। इन रिपोर्टों के न मिलने से सड़क हादसे, संदिग्ध मौत और अन्य गंभीर अपराधों की पुलिस जांच, बीमा दावों तथा मृतकों के आश्रितों को मिलने वाले सरकारी मुआवजे पर गहरा असर पड़ रहा है।
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डॉ. गोले के फरार होने से हत्या, दुष्कर्म और संदिग्ध मौत जैसे 12 से अधिक गंभीर मामलों की जांच पूरी तरह रुक गई है। इन आपराधिक प्रकरणों में पोस्टमार्टम और विसरा जांच रिपोर्ट अदालत में चालान पेश करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होती हैं। रिपोर्ट न होने के कारण पुलिस को आगे की अदालती प्रक्रिया में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिम्स प्रबंधन के अनुसार जिन शवों का पोस्टमार्टम आरोपी डॉक्टर ने किया था, उनके चिकित्सीय निष्कर्ष और विवरण उन्हीं के पास दर्ज थे। ऐसी स्थिति में किसी अन्य डॉक्टर से रिपोर्ट जारी करवाने पर विधिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। यही कारण है कि फॉरेंसिक विभाग के दूसरे चिकित्सक लंबित रिपोर्ट जारी करने पर फैसला नहीं ले पा रहे हैं।
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पीड़ित परिवारों की बढ़ी परेशानी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने से 40 से ज्यादा जीवन बीमा और अन्य वित्तीय दावे भी अधर में लटके हैं। जांजगीर, मुंगेली, कोटा और लोरमी जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग रिपोर्ट हासिल करने के लिए लगातार सिम्स पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें अगली तारीख देकर वापस लौटा दिया जा रहा है। फर्जीवाड़े का यह मामला बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत बताकर अवैध रूप से सरकारी मुआवजा और बीमा राशि हड़पने की जांच के दौरान सामने आया था। पुलिस जांच में फर्जी दस्तावेज और झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टर एसएन गोले, डॉ. प्रियंका सोनी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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विशेष टीमों का गठन
पुलिस इस फर्जीवाड़े में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि हाईकोर्ट से एक महिला डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपी डॉ. गोले की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दो विशेष टीमों का गठन किया है। पुलिस की साइबर सेल टीम भी आरोपी की लोकेशन का पता लगा रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नगर पंकज पटेल ने बताया कि पुलिस आरोपी डॉक्टर को जल्द ही गिरफ्तार कर लेगी। उधर सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि स्वास्थ्य संचालनालय और उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले में मार्गदर्शन मांगा गया है।
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