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CGPSC भर्ती घोटाला: सीबीआई के बाद ईडी की बड़ी कार्रवाई, पूर्व अफसरों और आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर छापे

Wed, 03 Jun 2026 02:42 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 03 Jun 2026 02:42 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती अनियमितता मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

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CGPSC recruitment scam case, the ED conducted major raids at locations linked to former officials and accused
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती अनियमितता मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। बुधवार को ईडी की टीमों ने रायपुर, भिलाई, राजनांदगांव और अन्य स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े कई आरोपियों और उनके परिजनों के ठिकानों की तलाशी ली।
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सूत्रों के अनुसार, ईडी ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत पांच अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी। कार्रवाई के केंद्र में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलको तथा आरोपी ललित गणवीर से जुड़े ठिकाने रहे।
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जांच एजेंसी की टीमों ने दस्तावेजों, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को खंगालना शुरू किया है। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों और संबंधित लोगों से भी पूछताछ की। माना जा रहा है कि जांच का फोकस भर्ती घोटाले से जुड़े आर्थिक पहलुओं और कथित अवैध लाभ के स्रोतों पर है।
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भिलाई के तालपुरी स्थित पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलको के निवास पर भी जांच की गई। खलको के परिवार के सदस्यों के नाम उस समय चर्चा में आए थे, जब आयोग की भर्ती प्रक्रिया में चयनित उम्मीदवारों को लेकर सवाल उठे थे। इसी तरह राजनांदगांव में कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गणवीर के घर भी ईडी की टीम पहुंची।

दरअसल, CGPSC भर्ती विवाद वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में हेरफेर की गई और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की अनदेखी की गई। डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर हुए चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। सीबीआई की जांच में कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों की भूमिका सामने आई, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी हुईं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का दुरुपयोग कर कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।


वर्तमान में इस मामले के कई आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ को जमानत मिल चुकी है। अब ईडी की एंट्री के बाद माना जा रहा है कि भर्ती घोटाले की जांच नए आयाम ले सकती है और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर भी कार्रवाई तेज होगी।
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