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CG News: प्रोजेक्ट उन्नति के तहत आत्मनिर्भरता की मिसाल बने 'दीपक'; मुर्गी पालन से कमा रहे हैं लाभ
Wed, 02 Apr 2025 02:58 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 02 Apr 2025 02:58 PM IST
सार
महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत संचालित प्रोजेक्ट उन्नति ने मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम हथनीकला के दीपक सिंह के जीवन को नई दिशा दी है। यह योजना न केवल दीपक बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो रही है।
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मुर्गी पालन से कमा रहे हैं लाभ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत संचालित प्रोजेक्ट उन्नति ने मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम हथनीकला के दीपक सिंह के जीवन को नई दिशा दी है। यह योजना न केवल दीपक बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो रही है।
प्रोजेक्ट उन्नति के तहत बकरी पालन, पशुपालन, कृषि सखी, पशु सखी और सूअर पालन जैसे विभिन्न स्वरोजगारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आत्मनिर्भर बन सकें। दीपक सिंह, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, पहले पूरी तरह से कृषि और मनरेगा की मजदूरी पर निर्भर थे। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और संकल्प से इसे बदलने का निर्णय लिया।
जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट उन्नति के अंतर्गत जब मुर्गी पालन प्रशिक्षण की पहल की गई, तो दीपक ने इसमें भाग लिया। उन्होंने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, बिलासपुर में 10 दिनों का वैज्ञानिक पद्धति से मुर्गी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें व्यवसायिक मुर्गी पालन की तकनीकी जानकारी मिली। प्रशिक्षण के बाद दीपक ने अपनी बचत और मनरेगा से प्राप्त धनराशि का उपयोग कर 10 मुर्गियों से शुरुआत की।
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धीरे-धीरे उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ाई और अधिक मुर्गियाँ खरीदीं। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका यह छोटा व्यवसाय अब एक सफल उद्यम में बदल चुका है। बढ़ती आय को देखते हुए दीपक ने 01 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक पोल्ट्री शेड का निर्माण किया, जिसमें अब 450 मुर्गियाँ हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि गाँव के अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलने लगे। अब गाँव के लोग मुर्गियाँ खरीदने के लिए दूर शहर जाने के बजाय सीधे दीपक से ही खरीदते हैं, जिससे ग्रामीण समुदाय को भी लाभ मिल रहा है।
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प्रोजेक्ट उन्नति के तहत बकरी पालन, पशुपालन, कृषि सखी, पशु सखी और सूअर पालन जैसे विभिन्न स्वरोजगारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आत्मनिर्भर बन सकें। दीपक सिंह, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, पहले पूरी तरह से कृषि और मनरेगा की मजदूरी पर निर्भर थे। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और संकल्प से इसे बदलने का निर्णय लिया।
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जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट उन्नति के अंतर्गत जब मुर्गी पालन प्रशिक्षण की पहल की गई, तो दीपक ने इसमें भाग लिया। उन्होंने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, बिलासपुर में 10 दिनों का वैज्ञानिक पद्धति से मुर्गी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें व्यवसायिक मुर्गी पालन की तकनीकी जानकारी मिली। प्रशिक्षण के बाद दीपक ने अपनी बचत और मनरेगा से प्राप्त धनराशि का उपयोग कर 10 मुर्गियों से शुरुआत की।
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धीरे-धीरे उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ाई और अधिक मुर्गियाँ खरीदीं। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका यह छोटा व्यवसाय अब एक सफल उद्यम में बदल चुका है। बढ़ती आय को देखते हुए दीपक ने 01 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक पोल्ट्री शेड का निर्माण किया, जिसमें अब 450 मुर्गियाँ हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि गाँव के अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलने लगे। अब गाँव के लोग मुर्गियाँ खरीदने के लिए दूर शहर जाने के बजाय सीधे दीपक से ही खरीदते हैं, जिससे ग्रामीण समुदाय को भी लाभ मिल रहा है।