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Monkey pox: मंकीपॉक्स को लेकर छत्तीसगढ़ में अलर्ट; स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी, ये हैं बीमारी के लक्षण

Thu, 29 Aug 2024 02:35 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Thu, 29 Aug 2024 02:35 PM IST
सार

Monkey pox News: छत्तीसगढ़ सरकार मंकी पॉक्स को लेकर अलर्ट है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को इस संबंध में एडवायजरी जारी की है।

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CG health news: Alert in Chhattisgarh regarding monkeypox; Health department issued advisory
मंकी पॉक्स को लेकर प्रदेश में अलर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

Monkey pox News: छत्तीसगढ़ सरकार मंकी पॉक्स को लेकर अलर्ट है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को इस संबंध में एडवायजरी जारी की है। सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को मंकी पॉक्स (एम-पॉक्स) नामक बीमारी के बचाव और रोकथाम के लिए एडवायजरी में दिए गए दिशा-निर्देशों का गंभीरपूर्वक पालन करने के निर्देश दिए गये हैं।

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स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 20 अगस्त 2024 को मंकी पॉक्स (एमपॉक्स) नामक बीमारी के बचाव व रोकथाम के लिए एडवायजरी जारी की गई है। मंकी पॉक्स (एम पॉक्स) को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 अगस्त 2024 को पब्लिक हेल्थ एमरजेन्सी ऑफ इंटरनेशनल कान्स (पीएचईआईसी) को घोषित किया गया है। विभिन्न देशों में संक्रमण के प्रसार को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सर्वेलेंस, जांच एवमं उपचार के लिये विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं, जिसके अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में भी मंकी-पॉक्स प्रकरणों की सर्वेलेंस, त्वरित पहचान, जांच एवं उपचार हेतु दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं।
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क्या है मंकी-पॉक्स?
मंकी-पॉक्स एक जीनेटिक बीमारी है जो मुख्य रुप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के क्षेत्रों में होता है,लेकिन वर्तमान में कुछ अन्य देशों में इसके केस मिल रहे हैं। देश के केरल राज्य में मार्च 2024 में केस मिले हैं।  मंकी-पॉक्स से संक्रमित व्यक्ति में सामान्यतः बुखार, चकत्ते एवं लिम्फ नोड्स में सूजन पायी जाती है। मंकी-पॉक्स एक स्व-सीमित (सेल्फ-लिमिटेड) संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्यतः 2-4 सप्ताह में खत्म हो जाते हैं। मंकी-पॉक्स संक्रमण के गंभीर प्रकरण सामान्यतः बच्चों में पाए जाते हैं। जटिलताओं एवं गंभीर प्रकरणों में मृत्यु दर 1 से 10  प्रतिशत है। मंकी-पॉक्स संक्रमण होने एवं लक्षण उत्पन्न होने का इनक्यूबेशन पीरियड सामान्यतः 6-13 दिन का होता है, लेकिन यह 5 से 25 दिवस तक हो सकता है। मंकी-पॉक्स का संक्रमण त्वचा में चकत्ते आने के 1-2 दिवस पूर्व से लेकर सभी चकत्तों से पपड़ी के गिरने/समाप्त होने तक मरीज के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में फैल सकता है।
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ऐसे फैलता है संक्रमण
मंकी-पॉक्स वायरस का संक्रमण पशु से मनुष्य में एवं मनुष्य से मनुष्य में फैल सकता है। मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण मुख्य रूप से लार्ज रेस्पिरेटरी सिस्टम के माध्यम से लम्बे समय तक संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने से होता है। वायरस का संक्रमण शरीर के तरल पदार्थ घाव के सीधे संपर्क में आने से अथवा अप्रत्यक्ष संपर्क जैसे दूषित कपड़ों, लिनेन इत्यादि के उपयोग से फैल सकता है। पशुओं से मनुष्यों में संक्रमण का प्रसार गांव के सीधे संपर्क में आने से हो सकता है।

कांटेक्ट ट्रेसिंग दल का होगा गठन 
मंकी-पॉक्स के संभावित केस की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया अनुसार सैंपल संग्रहण कर जांच के लिये लेबोरेटरी में भेजा जाएगा। मंकी-पॉक्स के प्रत्येक पॉजिटिव मरीज के सभी संपर्क व्यक्ति की पहचान करने के लिये सभी जिलों में जिला सर्वेलेंस अधिकारी के अधीन कांटेक्ट ट्रेसिंग दल का गठन किया जाएगा। संपर्क व्यक्ति को मंकी-पॉक्स मरीज के संपर्क में आने के 21 दिवस तक बुखार या त्वचा में चकत्ते के लिये दैनिक मॉनिटरिंग की जायेगी। संपर्क व्यक्तियों को 21 दिवस तक ब्लड, ऑर्गन, टिसू, सीमन इत्यादि डोनेशन करने से रोका जाए एवं ऐसे चिकित्सा कर्मी जो बिना प्रतिरक्षा उपकरण के मंकी-पॉक्स मरीज या उसके उपयोग किये हुए वस्तुओं के संपर्क में आया हो उसे 21 दिन तक मॉनिटर किया जाए व लक्षण-रहित चिकित्सा कर्मी को चिकित्सा कार्य से ना रोका जाये, ऐसे निर्देश दिए गए हैं।

21 दिन का लिया जाएगा विवरण
सभी जिलों में गत 21 दिवसों में मंकीपॉक्स के पुष्ट अथवा संभावित रोगी की सूचना वाले किसी देश में यात्रा कर आने वाले की भी स्क्रीनिंग की जाएगी। यदि किसी में लक्षण मिलता है तो उसकी केजीएमयू की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच कराई जाएगी। सैंपल भेजने के लिए भी अलग से टीम बनाने के निर्देश हैं। संदिग्ध मरीजों के बारे में तुरंत प्रदेश मुख्यालय पर बनी राज्य सर्विलांस इकाई को सूचित किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से निर्धारित दल की ओर से एंबुलेंस के माध्यम से संदिग्ध रोगियों को चिन्हित अस्पतालों (ट्रांजिट आइसोलेशन फैसिलिटी) में ट्रांसफर किया जायेगा।

मरीज के संपर्क में आने वालों की होगी निगरानी
यदि किसी में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है तो कोविड की तर्ज पर अन्य गतिविधियां चलाई जाएंगी। रोगी के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार कर जिला व राज्य स्तरीय सर्विलांस इकाइयों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ताकि संदिग्ध रोगी में मंकी पॉक्स की पुष्टि होने की स्थिति में तत्काल आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

मंकी पॉक्स के प्रमुख लक्षण
शरीर पर दाने, बुखार और लसिका ग्रंथियों में सूजन मंकीपॉक्स के मुख्य प्रारंभिक लक्षण हैं। ये लक्षण 2 से 4 सप्ताह तक बने रह सकते हैं। रोग की मृत्यु दर 1-10 फीसदी के बीच हो सकती है। मनुष्यों में मंकीपॉक्स रोग पशुओं अथवा अन्य संक्रमित मनुष्यों से आ सकता है। इस रोग का वायरस ब्रोकन स्किन (प्रदर्शित ना होने पर भी), श्वसन पथ, अथवा श्लेश्मिका झिल्लियों (आंख, नाक, या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए कपड़ों, बिस्तर, तौलिए, वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सतहों पर मंकी पॉक्स वायरस कुछ समय तक बना रह सकता है। वायरस गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में और जन्म के दौरान या उसके बाद त्वचा से संपर्क से या मंकी पॉक्स से संक्रमित माता-पिता से निकट संपर्क से शिशु में भी फैल सकता है।


इन देशों में है मंकी पॉक्स
27 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीका, केन्या, रवांडा, युगांडा, कांगो, लोकतांत्रिक गणराज्य, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो-ब्रेजाविल, कैमरून, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड (स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड में आयातित मामले) से मंकी पॉक्स के मामले सामने आए हैं। भारत में मंकी पॉक्स संक्रमण का अंतिम रोगी मार्च 2024 में केरल में मिला, जिसका अंतर्राष्ट्रीय यात्रा का इतिहास था। विभिन्न देशों से इस रोग के रोगी सूचित होने को दृष्टिगत रखते हुए भारत में इस रोग के संक्रमण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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