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कस्टम मिलिंग और शराब घोटाला मामला: अनवर को नहीं मिली जमानत,कोर्ट ने बढ़ाई टुटेजा और सोनी की रिमांड
Sat, 04 May 2024 08:13 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sat, 04 May 2024 08:13 PM IST
सार
CG Custom milling and liquor scam case: केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने शराब और कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपियों को आज शनिवार को कोर्ट में पेश किया।
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रायपुर कोर्ट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
CG Custom milling and liquor scam case: केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने शराब और कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपियों को आज शनिवार को कोर्ट में पेश किया। दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने ईडी को रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर अनिल टुटेजा की दस और मनोज सोनी की छह मई तक रिमांड मंजूरी दी है। दोनों आरोपी ईडी की ही रिमांड पर रहेंगे। मामले में ईडी ने कहा कि आरोपियों से अभी और पूछताछ करनी है। ईडी ने कोर्ट से अनिल टुटेजा की 11 और मनोज सोनी की छह दिन की और रिमांड मांगी थी।
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रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर टुटेजा और विशेष सचिव सोनी की आज रिमांड खत्म होने पर ईडी ने दोनों को रायपुर के स्पेशल कोर्ट में पेश किया। रिमांड बढ़ाने के लिए ईडी ने कोर्ट में आवेदन लगाया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने ईडी के आवेदन को मंजूर किया।
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दूसरी ओर शराब घोटाला में जेल में बंद रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के जमानत आवेदन पर भी कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ढेबर की याचिका खारिज कर दी। तीसरी ओर महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के आरोपी गिरीश तलरेजा, सूरज चोखानी सहित असीम दास को जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। ईडी ने उन्हें चार्जशीट के चार्ज फाइल करने के लिए अदालत में पेश किया।
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जानें क्या हैं दो हजार करोड़ का शराब घोटाला
ईडी की जांच के मुताबिक, पूर्व कांग्रेस सरकार में उच्च स्तरीय अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और राजनीतिक अधिकारियों वाला एक सिंडिकेट काम कर रहा था। छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। साल 2019-22 में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक काले धन की कमाई हुई। मनी लॉन्ड्रिंग मामला 2022 में दिल्ली की एक अदालत में दायर आयकर विभाग की चार्जशीट से उपजा है। पूर्व की कांग्रेस सरकार पर आरोप है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय) से शराब खरीदने के दौरान रिश्वतखोरी हुई। प्रति शराब मामले के आधार पर राज्य में डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई और देशी शराब को ऑफ-द-बुक बेचा गया। ईडी के मुताबिक, डिस्टिलर्स से कार्टेल बनाने और बाजार में एक निश्चित हिस्सेदारी की अनुमति देने के लिए रिश्वत ली गई थी।
एफआईआर के मुताबिक, अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर ने शराब घोटाला से मिले रकम को अपने परिवार वालों के नाम पर निवेश किया। टुटेजा ने अपने बेटे यश टुटेजा के नाम पर निवेश किया और त्रिपाठी ने अपनी पत्नी अपनी पत्नी मंजूला त्रिपाठी के नाम पर फर्म बनाया जिसका नाम रतनप्रिया मीडिया प्रइवेट लिमिटेड था। ढेबर ने अपने बेटे और भतीजों के फर्म पर पैसे निवेश किया।
जनवरी 2024 में हुई थी एफआईआर
एसीबी और ईओडब्ल्यू ने ईडी के पत्र के आधार पर जनवरी 2024 में एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू के दर्ज एफआईआर में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाला का मास्टरमाइंड बताया गया है। एफआईआर में शामिल बाकी आईएएस और अन्य सरकारी ऑफिसर और लोग सहयोग किये थे। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं तीनों को जाता था। टुटेजा आईएएस ऑफिसर हैं, जब घोटाला हुआ तब वे वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव थे। दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्तीसगढ़ मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के एमडी थे। वहीं अनवर ढेबर रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई और शराब कारोबारी है।
100 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर
ईडी ने शराब और कोयला घोटाला मामले में दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 100 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। इनमें भूपेश सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके कवासी लखमा, मंत्री मरजीत भगत, पूर्व विधायक, गुलाब कमरो, शिशुपाल, बृहस्पत सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, यूडी मिंज, विधायक देवेंद्र यादव के नाम शामिल हैं। इनके अलावा 2 निलंबित आईएएस (समीर विश्नोई, रानू साहू), रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर और कांग्रेस कोषाध्यक्ष समेत अन्य के नेताओं के नाम शामिल हैं।
जानें, कस्टम मिलिंग घोटाला
ईडी की रिपोर्ट पर कस्टम मिलिंग घोटला में एफआईआर दर्ज की गई है। कई राइस मिलर्स की ओर से नागरिक आपूर्ति निगम एवं एफसीआई में जो कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता है। उसमें व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध राशि की वसूली की गई है। पद का दुरूपयोग करते हुए विभिन्न शासकीय अधिकारियों की ओर से राइसमिलर्स के साथ मिलीभगत कर लाभ प्राप्त कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। प्रीतिका पूजा को मनोज सोनी, प्रबंध संचालक मार्कफेड के मारफत रोशन चन्द्राकर की ओर से निर्देश था कि उन्हीं मिलर्स के बिल का भुगतान किया जाना है जिनकी वसूली की राशि रोशन चन्द्राकर को प्राप्त हुई है। किन मिलर्स को भुगतान किया जाना है, इसकी जानकारी संबंधित जिले के राईस मिलर्स एसोसिएशन के द्वारा मनोज सोनी के माध्यम से मिलती थी। आयकर विभाग की तलाशी में करीब 1.06 करोड़ रूपये मिले हैं। जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। इसके साथ ही बहुत सारे आपत्तिजनक दस्तावेज एवं डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं। करीब 140 करोड़ रूपये की अवैध वसूली राइसमिलर्स से किया जाना पाया गया है।