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Chhattisgarh: सुशासन, एआई और कृषि सुधार पर मंत्रिमंडल का मंथन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गिनाईं उपलब्धियां
Sat, 04 Jul 2026 09:19 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 04 Jul 2026 09:19 PM IST
सार
राजधानी के भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 में राज्य सरकार ने सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस, कृषि विकास और उभरती तकनीकों को लेकर भविष्य की रणनीति पर मंथन शुरू किया।
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चिंतन शिविर 3.0
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 में राज्य सरकार ने सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस, कृषि विकास और उभरती तकनीकों को लेकर भविष्य की रणनीति पर मंथन शुरू किया। शिविर का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए नई कार्ययोजना तैयार करना है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन व्यवस्था में सुधार और नवाचार का प्रभावी मंच बन चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले दो चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं, जिनसे प्रशासनिक कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आई है।
शिविर के पहले दिन नेतृत्व विकास, सुशासन, आधुनिक तकनीकों और कृषि समृद्धि जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मूल्य आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन पर जोर दिया। वहीं नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकों के जरिए शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
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कृषि सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर सुझाव दिए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न सफल मॉडलों की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक, नवाचार और बेहतर नीति निर्माण के जरिए विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझावों के आधार पर आने वाले समय में सुशासन और जनसेवा से जुड़े कई नए कदम उठाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन व्यवस्था में सुधार और नवाचार का प्रभावी मंच बन चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले दो चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं, जिनसे प्रशासनिक कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आई है।
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शिविर के पहले दिन नेतृत्व विकास, सुशासन, आधुनिक तकनीकों और कृषि समृद्धि जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मूल्य आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन पर जोर दिया। वहीं नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकों के जरिए शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
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कृषि सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर सुझाव दिए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न सफल मॉडलों की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक, नवाचार और बेहतर नीति निर्माण के जरिए विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझावों के आधार पर आने वाले समय में सुशासन और जनसेवा से जुड़े कई नए कदम उठाए जाएंगे।