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बिल्हा ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान: स्वच्छता में देशभर में प्रथम, 'मन की बात' में पीएम मोदी ने की सराहना
Sun, 27 Jul 2025 06:59 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 27 Jul 2025 06:59 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ की नगर पंचायत बिल्हा ने स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पूरे भारतवर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
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बिल्हा ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ की नगर पंचायत बिल्हा ने स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पूरे भारतवर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए दिनांक 17 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित भव्य पुरस्कार समारोह में भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बिल्हा नगर पंचायत को सम्मानित किया गया था। आज इस गौरवशाली उपलब्धि की प्रतिध्वनि ‘मन की बात’ के राष्ट्रीय मंच तक पहुँची, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 124वें संस्करण में बिल्हा नगर पंचायत की महिलाओं द्वारा किए गए नवाचार और श्रम का उल्लेख करते हुए सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिल्हा की महिलाओं को वेस्ट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई और उन्होंने मिलकर शहर की तस्वीर बदल डाली। यह उल्लेख पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है, जिसने स्वच्छता को न केवल शासकीय योजना के रूप में, बल्कि सामुदायिक आंदोलन के रूप में अपनाया है।
नगर पंचायत बिल्हा की आबादी लगभग 15 हजार है, जहाँ 28 स्वच्छता दीदियाँ कार्यरत हैं। ये दीदियाँ नगर के 15 वार्डों में घर-घर जाकर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं और फिर कचरे को SLRM सेंटर में ले जाकर गीला और सूखा कचरा पृथक करती हैं। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है और सूखे कचरे को बेचकर ये महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसके अतिरिक्त बिल्हा नगर में 10 विशेष स्वच्छता कमांडो भी नियुक्त किए गए हैं जो ट्रैक्टर और ऑटो टिपर के माध्यम से पूरे शहर में घूमकर कचरा सफाई और जन-जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। बिल्हा नगर पंचायत द्वारा जन-जागरूकता अभियान, मुनादी, और घरों-दुकानों से सीधे कचरा संग्रहण जैसे कदमों से आज नगरवासी कचरे को पृथक कर ई-रिक्शा में देने के लिए प्रेरित हो चुके हैं। मुक्तिधाम, तालाब, गार्डन, सामुदायिक भवन आदि में सामूहिक सफाई अभियान भी समय-समय पर चलाए जाते हैं। इस सफलता का श्रेय सभी सफाई कर्मचारियों, स्वच्छता दीदियों, नगर पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों और सकारात्मक सोच वाले जनप्रतिनिधियों को जाता है, जो निरंतर निरीक्षण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।
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भारत में 20 हजार से कम आबादी वाले 2000 से अधिक नगरीय निकाय हैं। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सफाई व्यवस्था का परीक्षण, जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, रोड स्विपिंग, नाइट स्विपिंग, कचरा निपटान, शौचालयों और पार्कों की सफाई व्यवस्था सहित जनता से फीडबैक शामिल था, उसी के आधार पर यह सम्मान मिला है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिल्हा की महिलाओं को वेस्ट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई और उन्होंने मिलकर शहर की तस्वीर बदल डाली। यह उल्लेख पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है, जिसने स्वच्छता को न केवल शासकीय योजना के रूप में, बल्कि सामुदायिक आंदोलन के रूप में अपनाया है।
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नगर पंचायत बिल्हा की आबादी लगभग 15 हजार है, जहाँ 28 स्वच्छता दीदियाँ कार्यरत हैं। ये दीदियाँ नगर के 15 वार्डों में घर-घर जाकर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं और फिर कचरे को SLRM सेंटर में ले जाकर गीला और सूखा कचरा पृथक करती हैं। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है और सूखे कचरे को बेचकर ये महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसके अतिरिक्त बिल्हा नगर में 10 विशेष स्वच्छता कमांडो भी नियुक्त किए गए हैं जो ट्रैक्टर और ऑटो टिपर के माध्यम से पूरे शहर में घूमकर कचरा सफाई और जन-जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। बिल्हा नगर पंचायत द्वारा जन-जागरूकता अभियान, मुनादी, और घरों-दुकानों से सीधे कचरा संग्रहण जैसे कदमों से आज नगरवासी कचरे को पृथक कर ई-रिक्शा में देने के लिए प्रेरित हो चुके हैं। मुक्तिधाम, तालाब, गार्डन, सामुदायिक भवन आदि में सामूहिक सफाई अभियान भी समय-समय पर चलाए जाते हैं। इस सफलता का श्रेय सभी सफाई कर्मचारियों, स्वच्छता दीदियों, नगर पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों और सकारात्मक सोच वाले जनप्रतिनिधियों को जाता है, जो निरंतर निरीक्षण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।
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भारत में 20 हजार से कम आबादी वाले 2000 से अधिक नगरीय निकाय हैं। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से सफाई व्यवस्था का परीक्षण, जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, रोड स्विपिंग, नाइट स्विपिंग, कचरा निपटान, शौचालयों और पार्कों की सफाई व्यवस्था सहित जनता से फीडबैक शामिल था, उसी के आधार पर यह सम्मान मिला है।