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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी अब हिंदी में भी मिलेगी: चीफ जस्टिस राधाकृष्णन
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 10 Nov 2017 07:58 PM IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : highcourt.cg.gov.in
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने एलान किया है कि हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी अब हिंदी में भी मिलेगी। इस फैसले से उन लोगों को सुविधा होगी जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती और फैसले को समझने में दिक्कतें होती है। विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यक्रम में गुरुवार को चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी हिंदी में मुहैया कराने संबंधी महत्वपूर्ण एलान किया।
छत्तीसगढ़ राज्य का एक बड़ा हिस्सा वनवासी अंचल के रूप में जाना जाता है। बस्तर से लेकर बलरामपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर समेत आसपास का बड़े हिस्सा में क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल होता है। ऐसा माना जाता है कि कोर्ट के कामकाज में कठिन अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल होता है जिसके मायने समझना सबके बूते की बात नहीं होती।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में अब तक फैसले की कॉपी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही मिलती थी। हालांकि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने और बहस करने की छूट हिंदी में छूट थी।
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अभी ये साफ होना बाकि है कि हाईकोर्ट के फैसलों को हिंदी में अनुवाद किया जाएगा या फिर मांग के अनुसार आवेदकों को फैसले की कॉपी हिंदी में उपलब्ध कराई जाएगी। हिंदी में फैसले की कॉपी लेने के लिए अलग से शुल्क देने होंगे या फैसले की कॉपी लेने के लिए पहले से तय शुल्क ही अदा करने होंगे इस बारे में हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों का इंतजार है।
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छत्तीसगढ़ राज्य का एक बड़ा हिस्सा वनवासी अंचल के रूप में जाना जाता है। बस्तर से लेकर बलरामपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर समेत आसपास का बड़े हिस्सा में क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल होता है। ऐसा माना जाता है कि कोर्ट के कामकाज में कठिन अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल होता है जिसके मायने समझना सबके बूते की बात नहीं होती।
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गौरतलब है कि हाईकोर्ट में अब तक फैसले की कॉपी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही मिलती थी। हालांकि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने और बहस करने की छूट हिंदी में छूट थी।
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अभी ये साफ होना बाकि है कि हाईकोर्ट के फैसलों को हिंदी में अनुवाद किया जाएगा या फिर मांग के अनुसार आवेदकों को फैसले की कॉपी हिंदी में उपलब्ध कराई जाएगी। हिंदी में फैसले की कॉपी लेने के लिए अलग से शुल्क देने होंगे या फैसले की कॉपी लेने के लिए पहले से तय शुल्क ही अदा करने होंगे इस बारे में हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों का इंतजार है।