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Bilaspur: सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट का हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कही ये बात

Mon, 27 Jan 2025 03:37 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 27 Jan 2025 03:37 PM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं होने और मौजूद शौचालय को इस्तेमाल लायक नहीं होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई है।

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High Court took cognizance of media report about lack of toilets in government school in Bilaspur
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं होने और मौजूद शौचालय को इस्तेमाल लायक नहीं होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इस मामले में कहा ये कितनी गलत बात है..? कैसे यह हो रहा है..? इतने ग्रांट मिलने के बावजूद भी ऐसा हो रहा है..? वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी को नोटिस देकर व्यक्तिगत रूप से हलफनामा पेश करने कहा है।

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दरअसल, हाईकोर्ट ने बिलासपुर की मीडिया में आई खबर को संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया था कि 76वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, पर तस्वीर बदलना जरूरी। इस मीडिया रिपोर्ट में इस बात को भी बताया गया कि 150 स्कूलों में टॉयलेट नहीं है और 216 से ज्यादा बेहद खराब हैं। वहीं यूरिनल इन्फेक्शन की जानकारी भी प्रकाशित की गई है। 
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इस मामले को स्वतः संज्ञान लेकर हाइकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में इसे प्राथमिकता में दर्ज किया है। आज चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने इस मीडिया रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार पर नाराजगी जताई है । साथ ही इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई आगामी 10 फरवरी को निर्धारित  की गई है।

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प्रवासी पक्षियों की कमी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई 

प्रवासी पक्षियों की कमी को लेकर चिंता जताते हुए लगाई गई जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में इस पूरे मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर मत्स्य विभाग के सचिव से इस पूरे मामले में व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी 2025 को तय की गई है।

धमतरी की एक संस्था धमतरी वाइल्डलाइफ वेलफेयर सोसाइटी ने इस पूरे मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील अदिति सिंघवी ने  बताया की धमतरी जिले के गंगरेल बांध से जुड़ा एक भाग आर्द्र भूमि है। सिंचाई विभाग के अधीन अवैध रूप से पिंजरे में मछली पकड़ने का काम किया जा रहा है और यह वन भूमि है। सिंचाई विभाग ने बिना NOC के मछली पकड़ने पर रोक लगा दी। उसके बाद भी, जंगल की ज़मीन पर मछली पकड़ना जारी है। प्रवासी पक्षियों के आने की संख्या गिर गई है पहले पिछले 5 सालों में 5000 प्रवासी पक्षी से अब वह संख्या शून्य होने की स्थिति में है। इस क्षेत्र में अवैध रूप से एक केज कल्चर फिशिंग की जा रही है। अधिवक्ता ने कहा यह प्रवासी पक्षियों का मामला है। प्रवासी पक्षी वहाँ आते हैं।

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