{"_id":"6751c144cfa6c086e00043bd","slug":"high-court-gave-big-relief-to-dependents-of-eceased-teachers-2024-12-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chhattisgarh: हाईकोर्ट से मृत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों को बड़ी राहत, अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chhattisgarh: हाईकोर्ट से मृत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों को बड़ी राहत, अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश
Thu, 05 Dec 2024 08:36 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 05 Dec 2024 08:36 PM IST
सार
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा याचिकाकर्ताओं के पति/पिता/बड़े भाई थे। शिक्षाकर्मी ग्रेड I और III के पदों पर नियुक्ति थे। सेवाकाल के दौरान उनकी मौत हो गई । उनके आश्रितों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : highcourt.cg.gov.in
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिलासपुर- मृत शिक्षाकर्मियों के आश्रितों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है,कोर्ट ने शासन को 13 सितंबर 2021 के निर्णय के अनुसार समिति की बैठक कर याचिकाकर्ताओं को उनकी आपेक्षित योग्यता के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता खिलेश्वरी साहू, सिद्धार्थ सिंह परिहार, अश्वनी सोनवानी, त्रिवेणी यादव, बिंद्रा आदित्य के पति प्रदेश के विभिन्न जिला में शिक्षाकर्मी के पद में पदस्थ थे। सेवा काल के दौरान उनका निधन हो गया। मृतक के आश्रितों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। विभाग ने आवेदकों के पास बीएड, डीएड डिग्री व शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं होने के आधार पर आवेदन को निरस्त कर दिया गया।
इसके खिलाफ आवेदकों ने अधिवक्ता योगेश चंद्रा, सी जयंत राव सहित अन्य के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका लगाई। मामले में जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने सभी याचिकाओं को क्लब कर सुनवाई की। याचिका में बताया गया, कि विवादित अनुकंपा नियुक्ति के मामले में निराकरण करने 13 सितंबर 2021 को कमेटी बनाई गई। आवेदक शिक्षाकर्मी पद के लिए योग्य नहीं है किंतु वे चतुर्थ श्रेणी के पद में कार्य करने के लिये तैयार है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं के दावों पर इस आधार पर विचार नहीं किया गया है कि उनके पास अपेक्षित योग्यता नहीं है। सभी शिक्षकों (पंचायत) की सेवाएँ विद्यालय में समाहित कर ली गई हैं। शिक्षा विभाग 30.06.2018 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार और वर्तमान में विभाग में शिक्षाकर्मियों के पद उपलब्ध नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पद के लिए आवश्यक योग्यता हासिल नहीं की है शिक्षा कर्मी ग्रेड I, II और III; इसलिए, उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है।
तथ्यों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा एक निर्णय लिया गया, सरकार ने विवाद के समाधान हेतु दिनांक 13/09/2021 को समिति बनाई, लेकिन उसने आज तक कोई निर्णय नहीं लिया। कोर्ट ने 13 सितंबर 2021 की समिति को निर्णय लेकर दो माह के अंदर योग्य
विज्ञापन
याचिकाकर्ता खिलेश्वरी साहू, सिद्धार्थ सिंह परिहार, अश्वनी सोनवानी, त्रिवेणी यादव, बिंद्रा आदित्य के पति प्रदेश के विभिन्न जिला में शिक्षाकर्मी के पद में पदस्थ थे। सेवा काल के दौरान उनका निधन हो गया। मृतक के आश्रितों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। विभाग ने आवेदकों के पास बीएड, डीएड डिग्री व शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं होने के आधार पर आवेदन को निरस्त कर दिया गया।
विज्ञापन
इसके खिलाफ आवेदकों ने अधिवक्ता योगेश चंद्रा, सी जयंत राव सहित अन्य के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका लगाई। मामले में जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने सभी याचिकाओं को क्लब कर सुनवाई की। याचिका में बताया गया, कि विवादित अनुकंपा नियुक्ति के मामले में निराकरण करने 13 सितंबर 2021 को कमेटी बनाई गई। आवेदक शिक्षाकर्मी पद के लिए योग्य नहीं है किंतु वे चतुर्थ श्रेणी के पद में कार्य करने के लिये तैयार है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं के दावों पर इस आधार पर विचार नहीं किया गया है कि उनके पास अपेक्षित योग्यता नहीं है। सभी शिक्षकों (पंचायत) की सेवाएँ विद्यालय में समाहित कर ली गई हैं। शिक्षा विभाग 30.06.2018 को जारी एक अधिसूचना के अनुसार और वर्तमान में विभाग में शिक्षाकर्मियों के पद उपलब्ध नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पद के लिए आवश्यक योग्यता हासिल नहीं की है शिक्षा कर्मी ग्रेड I, II और III; इसलिए, उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है।
तथ्यों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा एक निर्णय लिया गया, सरकार ने विवाद के समाधान हेतु दिनांक 13/09/2021 को समिति बनाई, लेकिन उसने आज तक कोई निर्णय नहीं लिया। कोर्ट ने 13 सितंबर 2021 की समिति को निर्णय लेकर दो माह के अंदर योग्य