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बिलासपुर-उत्तरी बाईपास की राह में 8 गांवों की जमीन पर लगी रोक, 644 खसरों की खरीदी-बिक्री और बंटवारा प्रतिबंधित
Tue, 01 Sep 2026 09:15 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 01 Sep 2026 09:15 PM IST
सार
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर प्रस्तावित बिलासपुर-उत्तरी बाईपास को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। 4-लेन बाईपास के लिए चिन्हित एलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली जमीन के क्रय-विक्रय और विभाजन पर रोक लगा दी गई है।
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कलेक्टर संजय अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर प्रस्तावित बिलासपुर-उत्तरी बाईपास को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। 4-लेन बाईपास के लिए चिन्हित एलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली जमीन के क्रय-विक्रय और विभाजन पर रोक लगा दी गई है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह प्रतिबंध अंतिम भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक अधिसूचना जारी होने तक लागू रहेगा।
प्रशासन के मुताबिक प्रस्तावित बाईपास का निर्माण किलोमीटर 0.000 से 20.921 तक किया जाना है। इस परियोजना के एलाइनमेंट में आने वाले बिलासपुर जिले के सेंदरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजोर, मोपका, दोमुहानी और ढेंका गांवों की जमीन शामिल है। इन आठ गांवों के कुल 644 खसरों पर यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से परियोजना क्षेत्र में जमीन के संभावित अवैध या अनधिकृत लेन-देन को रोकने के लिए प्रशासन से कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इसी के बाद कलेक्टर ने जमीन के हस्तांतरण और विभाजन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।
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भू-अधिग्रहण में परेशानी रोकना मकसद
प्रशासन का कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री, बटांकन या छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजन होने से परियोजना की लागत बढ़ सकती है। साथ ही मुआवजा और स्वामित्व संबंधी प्रक्रिया भी जटिल हो सकती है। इससे महत्वपूर्ण सड़क परियोजना में देरी की आशंका रहती है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों के तहत भू-अर्जन की प्रक्रिया के अधीन भूमि के अंतरण, बटांकन और क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध का प्रावधान है। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई है। लगभग 20.921 किलोमीटर लंबे 4-लेन बिलासपुर-उत्तरी बाईपास का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रस्तावित मार्ग के लिए जरूरी भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर है।
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प्रशासन के मुताबिक प्रस्तावित बाईपास का निर्माण किलोमीटर 0.000 से 20.921 तक किया जाना है। इस परियोजना के एलाइनमेंट में आने वाले बिलासपुर जिले के सेंदरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजोर, मोपका, दोमुहानी और ढेंका गांवों की जमीन शामिल है। इन आठ गांवों के कुल 644 खसरों पर यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
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दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से परियोजना क्षेत्र में जमीन के संभावित अवैध या अनधिकृत लेन-देन को रोकने के लिए प्रशासन से कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इसी के बाद कलेक्टर ने जमीन के हस्तांतरण और विभाजन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।
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भू-अधिग्रहण में परेशानी रोकना मकसद
प्रशासन का कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री, बटांकन या छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजन होने से परियोजना की लागत बढ़ सकती है। साथ ही मुआवजा और स्वामित्व संबंधी प्रक्रिया भी जटिल हो सकती है। इससे महत्वपूर्ण सड़क परियोजना में देरी की आशंका रहती है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों के तहत भू-अर्जन की प्रक्रिया के अधीन भूमि के अंतरण, बटांकन और क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध का प्रावधान है। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई है। लगभग 20.921 किलोमीटर लंबे 4-लेन बिलासपुर-उत्तरी बाईपास का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रस्तावित मार्ग के लिए जरूरी भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर है।