फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   Hearing in HC on Thursday on petition related to absence of electronic evidence expert

Bilaspur: प्रदेश में नहीं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ, मामले में हाईकोर्ट का रुख सख्त; 9 को सुनवाई

Thu, 27 Mar 2025 11:22 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 27 Mar 2025 11:22 PM IST
सार

कोर्ट ने इस मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस मामले में प्रदेश में डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ की नियुक्ति और जरूरी अधिसूचनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई तय होगी।

विज्ञापन
Hearing in HC on Thursday on petition related to absence of electronic evidence expert
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का कोई विशेषज्ञ और प्रयोगशाला नहीं होने से जुड़ी याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। इसको लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। केंद्र सरकार के पत्र का जवाब क्यों नहीं दिया गया? इसको लेकर आज राज्य के मुख्य सचिव ने शपथपत्र पेश करने को समय मांगा। जिसपर हाइकोर्ट ने 9 अप्रैल तक की मोहलत दी है।

विज्ञापन


इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।  सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने फिर से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है। अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। दरअसल याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर ने अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल और रुद्र प्रताप दुबे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। पूर्व की सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि देशभर में 16 स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक कोई विशेषज्ञ नियुक्त नहीं हुआ है। 
विज्ञापन


कोर्ट ने इस मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस मामले में प्रदेश में डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ की नियुक्ति और जरूरी अधिसूचनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई तय होगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की स्थापना अनिवार्य है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79-ए के तहत राज्य में कोई प्रमाणित डिजिटल फोरेंसिक परीक्षक नहीं है, जिससे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा ने बताया कि केंद्र और राज्य स्तर पर डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की अधिसूचना के लिए एक योजना लागू की गई है। इसके तहत आइटी अवसंरचना, आवश्यक उपकरणों की स्थापना, प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति और प्रयोगशाला संचालन की प्रक्रिया शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल फोरेंसिक लैब की अधिसूचना के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिससे आगे की कार्रवाई संभव होगी। वही केंद्र सरकार को इससे जुड़ी जानकारी भेजी थी। जिसका जवाब नहीं मिला है। हाइकोर्ट ने इसको लेकर व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने निर्देश दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed