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दोषी जीजा को 20 साल की सजा: मेडिकल जांच में पुष्टि नहीं, छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने इस आधार पर सुनाया फैसला

Thu, 03 Apr 2025 08:59 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 03 Apr 2025 08:59 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साली से दुष्कर्म करने वाले आरोपी जीजा को सजा सुना दी है। हाईकोर्ट ने आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई है।

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Brother-in-law gets 20 years imprisonment for misdeed his 13-year-old sister-in-law
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

13 साल की नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म करने वाले जीजा को छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने 20 साल कैद की सजा सुनाई है। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि न होने के बावजूद पीड़िता और गवाहों के बयान के आधार पर यह सजा सुनाई गई है। पूरा मामला खैरागढ़ का है।

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जानकारी के अनुसार, पूरा मामला साल 2023 का है जब पीड़िता अपने घर के बाहर अपने भाई के साथ खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाला राजेलाल मरावी (पीड़िता के मौसी का दामाद) उसे बहला फुसला कर अपने घर लेकर चला गया जहां उसके पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पूरी रात खोजने के बाद पीड़िता अपने मां बाप को आरोपी के घर से बरामद हुई। उसने बताया कि राजेलाल ने उसके साथ गलत हरकत की है।
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इस बात की जानकारी लगते ही मां बाप में थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। जहां पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि, उसके साथ दो बार दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो के तहत अपराध दर्ज किया। हालांकि, मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई।
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मामले में सुनवाई के बाद पीड़िता और गवाहों के बयान के आधार पर निचली अदालत के आरोपी को जीवित रहते तक कठोर कारावास की सजा सुनाई। जिसके खिलाफ आरोपी के हाइकोर्ट में अपने वकील अमित बख्शी के माध्यम से अपील की। 


केस की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने माना कि दुष्कर्म के मामले में 16 साल से कम आयु की पीड़िता का बयान ही अपने आप में सबूत है। हालांकि, निचली अदालत के फैसले को संशोधित करते हुए हाइकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 20 साल की कैद में बदल दिया। पूरे मामले में सुनवाई चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच द्वारा की गई।

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