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Bilaspur High Court: रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में हाथियों की मौत के मामले में सुनवाई, दो सप्ताह का मिला समय

Tue, 25 Feb 2025 07:09 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 25 Feb 2025 07:09 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में हाथियों की मौत के मामले में सुनवाई लगातार चल रही है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बैंच में सुनवाई हुई।

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Bilaspur High Court Hearing in the case of death of elephants in Gharghoda of Raigarh district
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में हाथियों की मौत के मामले में सुनवाई लगातार चल रही है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बैंच में सुनवाई हुई। जिसमें कर्नाटक हाथी टास्क फोर्स रिपोर्ट, 2012 द्वारा अनुशंसित न्यूनतम ऊंचाई को लेकर निर्देशों का पालन  किए जाने के विषय में शपथपत्र दाखिल करने को लेकर पूछा गया। जिसपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शपथ पत्र की जानकारी काफी ज्यादा है, जिसपर समय लग रहा है,और कुछ दिनों का समय मांगा। जिसपर कोर्ट ने 2 सप्ताह का समय दे दिया है। 

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दरअसल रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में बिजली तार में प्रवाहित करंट की चपेट में तीन हाथी आ गये थे। इन तीनों की मौत होने के समाचार पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। इस याचिका पर ऊर्जा सचिव के अलावा प्रबंध निदेशक छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी,प्रधान मुख्य वन संरक्षक व, राज्य शासन को पक्षकार बनाया गया। इस घटना के कुछ दिनों बाद दीपावली से ठीक पहले अचानकमार वन क्षेत्र में भी इसी तरह करंट लगाए जाने से एक और हाथी मारा गया। बताया जाता है कि यहां शिकारियों ने जमीन पर करंट बिछाकर इस घटना को अंजाम दिया। चीफ जस्टिस की डीबी में पहले हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऊर्जा सचिव को जवाब देने कहा कि इस तरह ऊपर लगे हुए तार के सम्पर्क में हाथी कैसे आ गए ? वहीं हलफनामा पेश कर जवाब मांगा। 
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पिछली सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अदिति सिंघवी ने कहा कि वन क्षेत्रों में न्यूनतम निकासी 20 फीट होनी चाहिए, जैसा कि कर्नाटक हाथी टास्क फोर्स रिपोर्ट, 2012 द्वारा अनुशंसित किया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में न्यूनतम निकासी उक्त ऊंचाई से काफी कम है। जैसा कि  प्रतिवादी अधिकारियों ने 10 दिसंबर 2024 को दायर हलफनामे के पैराग्राफ संख्या 6 में भी स्पष्ट किया है।  इस तर्क के बाद हाइकोर्ट की डिवीजन बैंच ने इसके मद्देनजर छत्तीसगढ़ सरकार के ऊर्जा विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक को निर्देश देकर हस्तक्षेपकर्ता द्वारा 30 जनवरी 2025 के मामले में  दायर अपना उत्तर-शपथपत्र दाखिल करने निर्देश दिया। वहीं कोर्ट में आज हुई सुनवाई में  शपथपत्र दाखिल करने में समय की मांग की गई। जिसे स्वीकार करते हुए 2 सप्ताह के बाद सुनवाई तय करते हुए शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया गया है।

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स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

छत्तीसगढ़ में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। जिसमें सरकार की ओर से जवाब पेश करना था। लेकिन मंगलवार की सुनवाई के दौरान इसे पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट ने आज जवाब पेश करने और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उसकी कॉपी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। वहीं कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी रिजॉइंडर पेश करने का आदेश दिया है। 

दरअसल याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि वे सेवारत डॉक्टर हैं। 2024 की प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल की है। नियमों के अनुसार सेवारत श्रेणी के तहत पात्रता के लिए 31 जनवरी 2024 तक तीन साल की सेवा पूरी करना अनिवार्य है। लेकिन काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि कई अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से सेवारत श्रेणी का लाभ दिया गया है। प्रारंभिक सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है। वहीं मंगलवार को हुई सुनवाई में प्रदेश सरकार को आज इस पूरे मामले में शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी अगली सुनवाई तक जवाब पेश करने कहा है। 

याचिकाकर्ता डॉ. यशवंत राव और डॉ. पी राजशेखर ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है, इसमें बताया कि उन्हें मेडिकल पीजी में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि कई अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से सेवारत श्रेणी का लाभ दिया गया। अधिकारियों ने सेवा अवधि की गणना कटऑफ तारीख से आगे बढ़ा दी, जिससे अयोग्य उम्मीदवारों को भी पात्र मान लिया गया। उन्होंने विभाग में इस गड़बड़ी की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया कि जिम्मेदार अधिकारियों ने एक निजी उम्मीदवार को सेवारत श्रेणी में प्रमाणित किया है।

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