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शिकारियों पर शिकंजे की तैयारी: इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मॉक ड्रिल; खोजी कुत्ते से वन अपराध जांच का अभ्यास

Wed, 23 Sep 2026 09:14 PM IST
बीजापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Wed, 23 Sep 2026 09:14 PM IST
सार

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन अपराध और शिकार रोकने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। खोजी कुत्ते से साक्ष्य तलाशने का अभ्यास कराया गया और वन अमले को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया।

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Mock drill held at Indravati Tiger Reserve to crack down on poachers; practice session conducted on investigat
मॉक ड्रील करते वन अमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर जिले में वन्यप्राणियों की सुरक्षा और शिकार समेत वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मैदानी अमले को आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पिल्लूर परिक्षेत्र में विभागीय अधिकारियों और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों की मौजूदगी में मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
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मॉक ड्रिल का उद्देश्य वन कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों में वन अपराध और शिकार से जुड़े मामलों की पहचान, जांच और कार्रवाई के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण के दौरान मैदानी कर्मचारियों और सुरक्षा श्रमिकों को फील्ड स्तर पर विभिन्न प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया गया।
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खोजी कुत्ते से साक्ष्य तलाशने का अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान संभावित शिकार के मामले में डॉग स्क्वाड की मदद से संदिग्ध गतिविधियों और साक्ष्यों की तलाश करने का अभ्यास कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में फिलहाल एक ट्रैकिंग डॉग उपलब्ध है।
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विभाग के मुताबिक, इस ट्रैकिंग डॉग को विभागीय कार्यों में शामिल करने से पहले चंडीगढ़ में आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है। अब इसका इस्तेमाल वन अपराधों की जांच और वन गश्ती के दौरान किया जाएगा। भविष्य में डॉग स्क्वाड में और खोजी कुत्तों को शामिल करने की योजना भी बनाई जा रही है।

एंटी-स्नेयर वॉक और गश्त भी बढ़ाई गई
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इससे पहले एंटी-स्नेयर वॉक और टाइगर मॉनिटरिंग को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। इसके बाद वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एंटी-स्नेयर वॉक के साथ जंगलों में गश्त की गतिविधियां भी बढ़ाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि वन क्षेत्र में शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध उपकरणों की पहचान और उन्हें समय रहते हटाना वन्यजीव सुरक्षा की अहम कड़ी है। इसी उद्देश्य से मैदानी अमले को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है।

वन्यजीव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम गुप्ता ने कहा कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मैदानी अमले को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित कर सुदृढ़ किया जा रहा है।


वहीं, उप निदेशक सुमेध संजय सुरवाडे ने कहा कि वन सुरक्षा में नई तकनीक को शामिल करने की पहल की गई है। मैदानी कर्मचारियों को सक्षम बनाने के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
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