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Bijapur: जग्गूराम तेलामी बोले- आदिवासियों का भरोसा जीतने के बजाय बनाया जा रहा निशाना, ग्रामीणों से की मुलाकात

Wed, 10 Jul 2024 07:27 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़) Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 10 Jul 2024 07:27 PM IST
सार

जग्गूराम तेलामी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आदिवासी सीएम वाले राज्य में आदिवासियों पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं।

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Jagguram Telami said instead of winning trust of tribals in Bijapur
सर्व आदिवासी समाज की बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक के नड़पल्ली गांव के 95 लोगों को सुरक्षाबलों द्वारा जबरन अपने कैंप लाए जाने और पिटाई किए जाने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को सर्व आदिवासी समाज द्वारा गठित दल जग्गूराम तेलामी के नेतृत्व में नड़पल्ली के ग्रामीणों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली और रिपोर्ट तैयार कर समाज के संभागीय नेतृत्व को सौंपेगा।

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सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने बताया कि नड़पल्ली गांव कुल 120 मकान हैं जिसमें से 95 लोगों को नक्सली बताकर सुरक्षाबलों ने 5 जुलाई की सुबह 4 बजे घर से जबरदस्ती उठा कर कैंप लाया था। जब परिजन कैंप पहुंचे तो उन्हें पिछले दरवाजे से निकाल कहीं और पहुंचा दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक पकड़े गए लोगों में अब तक 72 लोगों को पिटाई कर छोड़ा गया है जबकि 13 लोग अभी भी पुलिस हिरासत में हैं। 

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इन 13 लोगों में पांच ऐसे लोग भी हैं जो नक्सल मामले में जेल से रिहा किए जा चुके थे। करीब 15 दिन पहले टोरा बिनने के दौरान नक्सलियों द्वारा लगाए आईईडी के चपेट में आने से दोनों पैर गंवा चुकी बुजुर्ग महिला के बेटे को भी सुरक्षाबलों ने नहीं छोड़ा उसे भी हिरासत में रखा गया है। घटना का पूरा विवरण सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर को सौंपा जाएगा।

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जग्गूराम तेलामी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आदिवासी सीएम वाले राज्य में आदिवासियों पर अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं। जिले के अन्य इलाकों से ग्रामीणों को नक्सलियों के नाम पर पकड़ने की सूचना मिलती रही है पर यह पहली घटना है जब 120 घरों वाले गांव के 95 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार और आदिवासियों के बीच दूरी और अविश्वास की भावना बढ़ती जा रही है। जिले के सीमावर्ती और अंदरूनी गांव से लोग पड़ोसी राज्य में पलायन पर मजबूर हो रहे हैं। आदिवासियों का भरोसा जीतने के बजाय आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार यहां के जनजातीय समुदाय के साथ समन्वय और संवाद स्थापित कर विश्वास में लेकर विकास कार्यों को बढ़ाए न कि आदिवासियों को जेल भेज कर।

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