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फर्जी सेबी अफसरों का गैंग: पॉलिसी के पैसे दिलाने के नाम पर ठगे 9.93 लाख रुपये; दिल्ली-गाजियाबाद से 3 गिरफ्तार

Tue, 13 Jun 2023 08:11 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजापुर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Tue, 13 Jun 2023 08:11 PM IST
सार

पुलिस ने बताया कि, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ और गरियाबंद में भी फ्राड का मामला दर्ज है। अब तक आरोपियों के खिलाफ करीब 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है। 
 

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chhattisgarh police arrested three of fake SEBI gang from Delhi-Ghaziabad
पुलिस गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ की बीजापुर में पॉलिसी के राशि वापस दिलाने के नाम पर एक युवक से 9.93 लाख रुपये की ठगी हो गई। खुद को सेबी का अफसर बताकर ठगों ने प्रोसेसिंग फीस और अन्य के नाम पर रुपये खाते में ट्रांसफर करा लिए। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली और गाजियाबाद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक युवती भी शामिल है। इनसे लैपटॉप, मोबाइल, पैनकार्ड, आधार कार्ड, डेबिट कार्ड, पासबुक और हार्डडिस्क बरामद हुई है। आरोपियों के खिलाफ मनेंद्रगढ़ और गरियाबंद में भी साइबर फ्रॉड के मामले में दर्ज हैं। उनमें आरोपी नामजद हैं। 

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सेबी हैदराबाद से बात करने की ठगों ने दी जानकारी
जानकारी के मुताबिक, तहसील पारा निवासी कौशिक मोरला ने बीजापुर थाने में ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि, उनके पास एक लड़की का कॉल आया। कॉल करने वाली  ने अपना नाम अंजली शर्मा बताया और कहा कि, वह सेबी कार्यालय हैदराबाद से बात कर रही है। अगर आपकी पॉलिसी का पैसा वापस नहीं मिला हो तो शिकायत दर्ज कराने पर दिला सकते हैं। उसकी बातों में आकर कौशिक ने जानकारी दी कि साल 2012 में साई प्रसाद कंपनी से ली गई पॉलिसी की राशि नहीं मिली है। फिर दूसरे नंबर से कॉल आया और उसने खुद को सेबी अफसर मधुकर राव बताया। 
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प्रोसेसिंग फीस, वकील शुल्क के नाम पर ठगा
ठग ने कौशिक से कहा कि, उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए आधार कार्ड, पॉलिसी नंबर और दस्तावेज मेल पर उपलब्ध कराने होंगे। इस पर कौशिक ने मेल पर जानकारी भेजी तो उसे शिकायत नंबर दे दिया गया। फिर मधुकर राव ने प्रोसेसिंग फीस, वकील की फीस आदि बताकर 9,93,000 रुपये ले लिए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उसके राशि नहीं मिली तो उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने ठगों से पूछताछ की, लेकिन नंबर बंद मिले। इसके बाद कौशिक पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए सायबर सेल के साथ संयुक्त टीम का गठन किया। 
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खाते और सिम के पते फर्जी निकले
जांच के दौरान पुलिस को ठगों की लोकेशन दिल्ली और गाजियाबाद मिली तो वहां टीम को भेजा गया। टीम ने ठगों के खाते और सिम के पते की जानकारी ली तो वो फर्जी निकला। इसके बाद सिम नंबर की सीडीआर निकाली गई और टेलीकॉम कंपनी से कनेक्शन का पता लगाया गया। पुलिस ने मिले एड्रेस पर दबिश देकर वहां से मंडोली, उत्तरी दिल्ली निवासी नैना  और शाहदरा विवेक विहार निवासी राहुल उपाध्याय को पकड़ लिया। उसने पूछताछ के आधार पर राहुल को झांसे में लेकर अन्य आरोपी शाहदरा निवासी राजीव सिंह को बुलाकर पकड़ा गया। 


अब तक 50 लाख की धोखाधड़ी के मामले आ चुके सामने
पकड़े गए आरोपियों से दौ लैपटॉप, पांच मोबाइल, एक एक्सटर्नल हार्डडिस्क, विभिन्न बैंक के दो चेकबुक, एक पासबुक, विभिन्न बैंकों के पांच एटीएम कार्ड, तीन पैनकार्ड, सात आधार कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने तीनों आरोपियों को नौ जून को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड के लिए गाजियाबाद कोर्ट में पेश किया और 72 घंटे की रिमांड लेकर बीजापुर पहुंची। पुलिस ने बताया कि, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ और गरियाबंद में भी फ्राड का मामला दर्ज है। अब तक आरोपियों के खिलाफ करीब 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है। 

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