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बीजापुर में डीएमएफ भर्ती में गड़बड़ी का आरोप: स्थानीय युवाओं की अनदेखी का आरोप, विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र
Tue, 25 Aug 2026 04:19 PM IST
बीजापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:19 PM IST
सार
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता और स्थानीय अभ्यर्थियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
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विधायक विक्रम मंडावी की फ़ोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीजापुर जिला खनिज न्यास निधि से स्वास्थ्य विभाग में की जा रही भर्ती को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता और स्थानीय अभ्यर्थियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
विधायक ने पत्र में हॉस्पिटल कंसल्टेंट और पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दोनों पदों के लिए अलग-अलग आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन कौशल परीक्षा और साक्षात्कार में मिले अंकों को जोड़कर एक ही प्रक्रिया के आधार पर अंतिम चयन सूची जारी की गई। विधायक ने इस व्यवस्था को लेकर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती विज्ञापन में न्यूनतम अंक को लेकर कोई स्पष्ट शर्त निर्धारित नहीं की गई थी। इसके बावजूद स्थानीय अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंक के आधार पर परीक्षा में अनुत्तीर्ण कर दिया गया। विधायक का कहना है कि इस व्यवस्था से जिले के योग्य और स्थानीय बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हुए हैं। विधायक ने अपने पत्र में भर्ती विज्ञापन में स्थानीय एवं योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने संबंधी प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इन निर्देशों का भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित रूप से पालन नहीं किया गया।
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मामले को गंभीर बताते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कलेक्टर से पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, वर्तमान प्रक्रिया को निरस्त करने और नए सिरे से पारदर्शी कौशल परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने स्थानीय बेरोजगार अभ्यर्थियों को नियमानुसार प्राथमिकता देने की बात कही है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। प्रशासन इस शिकायत पर क्या निर्णय लेता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई जांच होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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विधायक ने पत्र में हॉस्पिटल कंसल्टेंट और पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दोनों पदों के लिए अलग-अलग आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन कौशल परीक्षा और साक्षात्कार में मिले अंकों को जोड़कर एक ही प्रक्रिया के आधार पर अंतिम चयन सूची जारी की गई। विधायक ने इस व्यवस्था को लेकर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती विज्ञापन में न्यूनतम अंक को लेकर कोई स्पष्ट शर्त निर्धारित नहीं की गई थी। इसके बावजूद स्थानीय अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंक के आधार पर परीक्षा में अनुत्तीर्ण कर दिया गया। विधायक का कहना है कि इस व्यवस्था से जिले के योग्य और स्थानीय बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हुए हैं। विधायक ने अपने पत्र में भर्ती विज्ञापन में स्थानीय एवं योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने संबंधी प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इन निर्देशों का भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित रूप से पालन नहीं किया गया।
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मामले को गंभीर बताते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कलेक्टर से पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, वर्तमान प्रक्रिया को निरस्त करने और नए सिरे से पारदर्शी कौशल परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने स्थानीय बेरोजगार अभ्यर्थियों को नियमानुसार प्राथमिकता देने की बात कही है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। प्रशासन इस शिकायत पर क्या निर्णय लेता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई जांच होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।