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Bijapur: तारलागुड़ा में लाल पानी से प्यास बुझा रहे पोटाकेबिन के 500 बच्चे, एक साल से खराब पड़ी है फिल्टर मशीन

Wed, 17 Jul 2024 07:12 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़) Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 17 Jul 2024 07:12 PM IST
सार

बीजापुर में भोपालपटनम ब्लाक अंतिम छोर पर बसे तारलागुड़ा में संचालित रेसिडेंशियल कन्या व बालक  आवासीय विद्यालय एवं आरएमएसए बालक व बालिका पोटाकेबिन के सैकड़ो बच्चे इन दिनों दूषित पानी पीने  को मजबूर हैं।

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500 children of Pota Cabin are quenching their thirst with red water in Tarlaguda in Bijapur
लाल पानी से प्यास बुझा रहे पोटाकेबिन के 500 बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर में भोपालपटनम ब्लाक अंतिम छोर पर बसे तारलागुड़ा में संचालित रेसिडेंशियल कन्या व बालक  आवासीय विद्यालय एवं आरएमएसए बालक व बालिका पोटाकेबिन के सैकड़ो बच्चे इन दिनों दूषित पानी पीने  को मजबूर हैं। यहां लगे हैंडपंपो में लाल पानी आता है। इसके आलावा बच्चो के पीने के पानी का दूसरा कोई विकल्प नहीं हैं। कन्या पोटाकेबिन मे पदस्थ अनुदेशकों ने बताया कि फ़िल्टर प्लांट लगा हुआ हैं। जिससे पानी फ़िल्टर होकर साफ सुथरा मिलता था। मगर वह भी तक़रीबन 1 साल से ख़राब पड़ा हुआ हैं। जिसके चलते बच्चों को बोर से निकलता आयरन युक्त पानी पीना पड़ रहा है।

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यहां रह रहे चार पोटाकेबिन के तक़रीबन 500 से अधिक बच्चो को आयरन वाला पानी पीना पड़ रहा है।जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ रहा है। बच्चे इस दूषित पानी को पीकर बीमार भी पड़ रहे हैं। कन्या पोटाकेबिन मे लगभग 250 बच्चे अध्यानरत हैं। वही बालक पोटाकेबिन मे भी लगभग 250 बच्चे रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। आरएमएसए बालक बालिका में 100 बच्चे अध्यनरत है। आश्रम शालाओं के बच्चों के लिए हैंडपंप के अलावा पानी का कोई अन्य स्त्रोत नहीं है। बच्चो के स्वास्थ्य के मामले मे प्रशासन भी बेखबर हैं। हाल ही मे तारलागुडा पोटाकेबिन व संगमपल्ली पोटाकेबिन मे दो बच्चो कि मलेरिया से मौत हो गई थी। इसको लेकर प्रशासन नें हड़कंप मच गया था। सोमवार को स्वास्थय मंत्री बीजापुर आकर उन्होंने स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की। लेकिन ऐसी परिस्थितियों कि ओर सम्बंधितो का ध्यान नहीं हैं।
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एक साल से ख़राब पड़ी फ़िल्टर मशीन
समग्र शिक्षा रेसिडेंशियल कन्या आवासीय विद्यालय तारलागुडा परिसर मे फ़िल्टर प्लांट लगाया गया हैं। लेकिन वह एक साल से ख़राब पड़ा हुआ हैं। बच्चे हैंडपंप से निकलता हुआ लाल व दूषित पानी पी रहे हैं।आश्रमो मे मौत कि घटनाएं सामने आने के बाद भी प्रशासन और न ही संबंधित विभाग गंभीर हैं। एक साल से ख़राब पड़े फ़िल्टर प्लांट को बनाने कि कवयात नहीं कि गई हैं। ऐसे मे बच्चों के स्वस्थ्य रहने की कैसे उम्मीद की जा सकती है।
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मौत कि घटनाओ के बाद भी सबक नहीं
लगातार हुई मौत कि घटनाओ के बाद भी विभाग बेखबर हैं बीमारियों से बचने के लिए विभाग कोई ठोस उपाए करता नजर नहीं आ रहा हैं। तारलागुडा आश्रम शालाओं मे लाल पानी के घेरे मे बच्चे हैं। बोरिंग से निकलता पानी जंग खाया हुआ व बदबूदार हैं। पानी साफ सुथरा करने वाले उपकरण खराब पड़े हुए हैं।


क्या कहते है अफसर 
पीएचई के उप अभियंता बीआर बंजारे ने बताया कि कोत्तूर पंचायत के तारलागुड़ा में आयरन की मात्रा है। कुछ हेंडपम्प को बंद करना पड़ा।लेकिन पोटाकेबिन का पानी ठीक है। 0.3पीपीएम से 0.7पीपीएम आयरन की मात्रा है। यहाँ पानी पीने योग्य है, फ्लोराइड की मात्रा बिल्कुल नहीं है। कोत्तुर में 31और तारलागुड़ा में 11 हेंडपम्प है। हरिजन पारा, थाना के पास और पोटाकेबिन के पास के तीन हेंडपम्पो में आयरन की मात्रा अधिक होने से उन्हें बंद करना पड़ा। वही बीएमओ डॉक्टर चलपति राव ने बताया कि आयरन की मात्रा पानी मे अधिक होने से बच्चों को किडनी और लीवर पर असर पड़ सकता है, और हाथ पैरों में दर्द और हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो सकती है। दांत खराब हो सकते है, कैंसर जैसी जान लेवा बीमारी भी आ सकती है।

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