सैलानियों के लिए तरसता बस्तर

Shobha Shami Updated Tue, 21 Jan 2014 10:53 AM IST
bastar_tourism
माओवादी घटनाओं के लिए चर्चित छत्तीसगढ का बस्तर इलाका इन दिनों पर्यटकों का अकाल झेल रहा है।

कभी अनछुए प्राकृतिक स्थलों के लिए बस्तर का रुख करने वाले राज्य और राज्य से बाहर के सैलानी अब बस्तर नहीं आना चाहते।

राज्य के गृह मंत्री रामसेवक पैकरा का कहना है कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं लेकिन माओवादियों के कारण पर्यटक दूर हो रहे हैं।

2009 में इस इलाके में 52 हजार से अधिक पर्यटक आए थे। लेकिन यह आंकडा धीरे-धीरे घटता चला गया। आज हालत ये है कि पिछले साल राज्य से बाहर से बस्तर आने वालों का आंकडा बमुश्किल 22 हजार तक पहुंच पाया।

राज्य के पर्यटन विभाग ने पिछले कुछ सालों में देश-विदेश में बस्तर के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार में करोडों रुपये खर्च किए हैं। लेकिन अब पर्यटन विभाग ने भी बस्तर को हाशिए पर रख दिया है।

चित्रकोट जलप्रपात की फ्लड लाइट महीनों से खराब है तो पर्यटकों के लिए बनाए गए टेंट बजट के अभाव में अधूरे पडे हुए हैं। कांगेर घाटी की सडक का हाल बुरा है और इन तमाम जगहों पर जाने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से परिवहन की कोई सुविधा नहीं है।

राज्य के संस्कृति और पर्यटन मंत्री अजय चंद्राकर भी मानते हैं कि बस्तर में पर्यटकों की संख्या में कमी आई है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि समय के साथ इसमें सुधार होगा।

नैसर्गिक सौंदर्य का गढ

बस्तर अपने अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य को लिए मशहूर रहा है। घने जंगल, जानी-अनजानी रहस्यमयी गुफाएं और सुंदर जलप्रपात बस्तर की पहचान हैं।

भारत का नियाग्रा कहे जाने वाला देश का विशालतम चित्रकोट जलप्रपात बरसों से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। बस्तर पहुंचने वाले लोग कुटुमसर गुफा और उसमें पाई जाने वाली अंधी मछलियों को देखने का मोह संवरण नहीं कर पाते।

बस्तर की सल्फी और लाल चीटियों की चटनी के किस्से देश-विदेश में मशहूर रहे हैं।

दंतेश्वरी मंदिर, बारसूर, तीरथगढ, बोधघाट सातधारा जैसी जगहों पर पर्यटकों की भीड रहती थी। आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात समेत दूसरे राज्यों से पर्यटक बस्तर पहुंचते थे। विदेशी सैलानियों का भी बस्तर आना-जाना लगा रहता था।

लेकिन अब ऐसा नहीं है।

माओवाद

राज्य के गृह मंत्री रामसेवक पैकरा साफ तौर पर मानते हैं कि माओवादियों के कारण पूरा बस्तर प्रभावित हुआ है और पर्यटक भी इस भय के कारण बस्तर जाने से हिचकिचाते हैं।

पैकरा का मानना है कि केंद्र अगर सहयोग करे तो माओवादियों से निपटा जा सकता है और उसके बाद बस्तर देश के मानचित्र पर एक खास पर्यटन केंद्र के तौर पर स्थापित हो सकता है।

पैकरा कहते हैं, “हम तो माओवादियों से भी अपील करते हैं कि बस्तर के आदिवासियों के विकास के लिए वे समाज की मुख्यधारा में आएं और हिंसा का रास्ता छोडें।”

पिछले साल 25 मई को झीरम घाटी में माओवादी हमले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री विद्याचरण शुक्ल, आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा समेत 29 लोगों की मौत के बाद कांगेर घाटी की यात्रा करने वाले हिचकिचा रहे हैं।

बस्तर की इंद्रावती नेशनल पार्क का हाल ये है कि पर्यटक छोडिए, पिछले कई सालों से वन विभाग इस नेशनल पार्क में जानवरों की गणना का काम बंद कर चुका है।

राज्य की पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर ‘एक्सप्लोर प्लेसेस’ में राज्य के 16 इलाके शामिल हैं लेकिन बस्तर जिला और उसका मुख्यालय जगदलपुर इसमें शामिल नहीं हैं।

सुविधाओं की कमी
कुटुमसर गुफा पहुंचे युवा फिल्मकार तेजेंद्र ताम्रकार कहते हैं, “बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या भले कम हो लेकिन पूरे बस्तर में बाहरी लोगों की बसावट बहुत हो गई है। पर्यटन विभाग भी बाहर से आने वाले पर्यटकों को कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।”

बस्तर के स्थानीय निवासी संजय बघेल का कहना है कि नक्सलियों के कारण बस्तर की छवि ऐसी बन गई है कि जैसे यहां हर समय गोलियां बरसती रहती है और बारुदी सुरंग फटती रहती हैं। जब छवि ऐसी है तो पर्यटक भला यहां कैसे आएंगे ?

राज्य के पर्यटन मंत्री अजय चंद्राकर कहते हैं, “मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि बस्तर में पर्यटकों की संख्या कम हुई है। लेकिन इसके पीछे जो कारण हैं, वो दूसरे हैं। हमें उम्मीद है कि राज्य शासन के प्रयास से आने वाले दिनों में हम इसे दुरुस्त कर लेंगे।”

Spotlight

Most Read

National

इलाहाबाद HC का निर्देश- CBI जांच में सहयोग करे लोक सेवा आयोग

कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए छह फरवरी तक की मोहलत दी है।

19 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: IED ब्लास्ट में जख्मी महिलाओं को इस तरह ले जाया गया अस्पताल

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के बीजापुर में दो ग्रामीण महिलाएं आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ जाने की वजह से घायल हो गईं। इनका इलाज बीजापुर के जिला अस्पताल में चल रहा है।

9 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper