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बलौदाबाजार: सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी, पूर्व भाजपा नेता पर छठी एफआईआर

Thu, 08 Oct 2026 02:07 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, बलौदाबाजार
अमर उजाला नेटवर्क, बलौदाबाजार Published by: अमन कोशले Updated Thu, 08 Oct 2026 02:07 PM IST
सार

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर तीन बेरोजगार युवाओं से 10.48 लाख रुपये लेने का आरोप सामने आया है। मामले में भाजपा से निष्कासित पूर्व जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी के खिलाफ गिधौरी पुलिस ने छठी एफआईआर दर्ज की है। 

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Balodabazar: Sixth FIR against former BJP leader for cheating in the name of government job
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बलौदाबाजार जिले में शासकीय नौकरी दिलाने के नाम पर तीन बेरोजगार युवाओं से 10 लाख 48 हजार रुपये की कथित ठगी के मामले में भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित पूर्व जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज हुई है। गिधौरी पुलिस ने यह कार्रवाई पीड़ित युवाओं की शिकायत पर की है। इस मामले में भाजपा जिला उपाध्यक्ष और कसडोल क्षेत्र के नेता पुनीराम पटेल का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ छठी एफआईआर दर्ज करके मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
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बिचौलियों के माध्यम से संपर्क और ठगी
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी गिरोह बनाकर नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। वे संपर्क सूत्रों और बिचौलियों के जरिये बेरोजगारों से संपर्क साधते थे। शासकीय नौकरी लगवाने का झूठा आश्वासन देकर बिचौलिए बेरोजगारों को कृष्णा अवस्थी से मिलवाते थे। गिधौरी थाना प्रभारी उप निरीक्षक संदीप बंजारे ने बताया कि शिकायतकर्ताओं ने नौकरी के नाम पर लाखों रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि पीड़ित बेरोजगार सबसे पहले भाजपा जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल के संपर्क में आए थे। पीड़ितों ने शुरुआत में उन्हें 30 हजार रुपये दिए, जिसके बाद उन्होंने अभ्यर्थियों की मुलाकात कृष्णा अवस्थी से कराई।
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बैंक खाते में ट्रांसफर और नकद लेनदेन
पीड़ित अभ्यर्थियों की शिकायत के अनुसार कृष्णा अवस्थी के संपर्क में आने के बाद दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में रुपयों का लेन-देन हुआ। आरोपियों ने लगभग पांच लाख रुपये फोन-पे के जरिये कृष्णा अवस्थी के बेटे प्रणव अवस्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए। इसके अलावा उन्होंने करीब पांच लाख रुपये नकद राशि के रूप में भी हासिल किए। इस तरह आरोपियों ने तीनों बेरोजगार युवाओं से कुल 10 लाख 48 हजार रुपये ऐंठ लिए।
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फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने से पर्दाफाश
सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम ऐंठने के बाद आरोपियों ने अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए। जब पीड़ितों ने इन सरकारी दस्तावेज की सत्यता जांचने के लिए पड़ताल कराई, तो उन्हें इनके पूरी तरह फर्जी होने का पता चला। खुद को ठगी का शिकार पाकर पीड़ितों ने तत्काल गिधौरी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, फोन-पे ट्रांजेक्शन, नकद लेन-देन और फर्जी नियुक्ति पत्रों की गहनता से पड़ताल कर रही है।


राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल और जांच
पीड़ितों ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी अपनी राजनीतिक पहचान और प्रभाव का भरोसा दिलाकर शासकीय नौकरी पाने का झूठा सपना दिखाते थे। इस नए मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने अन्य युवाओं को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया है। कृष्णा अवस्थी और प्रणव अवस्थी के खिलाफ पूर्व में भी अलग-अलग मामलों में प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं। गिधौरी पुलिस आरोपियों के आपसी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
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