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Balod: पक्षियों की सुरक्षा के लिए वर्किंग वूमेंस की पहल, सकोरों को रीसाइकिल कर दाने-पानी की व्यवस्था

Wed, 14 May 2025 03:29 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 14 May 2025 03:29 PM IST
सार

बालोद शहर की अभिप्रेरणा ग्रुप जो की एक वर्किंग वूमंस का टीम है इस टीम में विभिन्न विभागों की महिलाएं एकजुट होकर जनहित का कार्य करती है।

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Initiative of working women to protect birds arrangement of food and water by recycling bowls in Balod
पक्षियों के लिए दाना- पानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालोद शहर की अभिप्रेरणा ग्रुप जो की एक वर्किंग वूमंस का टीम है इस टीम में विभिन्न विभागों की महिलाएं एकजुट होकर जनहित का कार्य करती है। मई का महीना है और भीषण गर्मी अपने चरम पर हैं हमें तो आसानी से पानी मिल जाता है बेजुबान जानवरों को भी जमीन पर पानी मिल ही जाता है लेकिन आसमान में उड़ने वाले पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ता है और कई पक्षी पेयजल के अभाव में मृत्यु हो जाते हैं इन्हीं सब विषयों को गंभीरता से लेकर अभिप्रेरणा ग्रुप ने पक्षियों के लिए दाना पानी करने का जिम्मा उठाया पहले तो नदियों में पूजा पाठ के बाद विसर्जित किए जाने वाले कलश और सकोरों को रीसायकल किया और फिर उन्हें अपने घरों में चो पर दाना और पानी की व्यवस्था कर रख रहे हैं यही नहीं इन महिलाओं का यह अभियान अब जन अभियान का स्वरूप ले रहा है।

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महिलाओं के इस समूह ने एक छोटे से शुरुआत के साथ पक्षियों के जीवन संरक्षण का संकल्प लिया था धीरे-धीरे यह पहल जन आंदोलन बन गया इन महिलाओं को अब विभिन्न मोहल्लों और गांव से फोन आते हैं और यह सकोरा लेकर उनके यहां पहुंच जाते हैं और लोगों को जागरुक भी करते हैं कि यह महज एक दिखावा नहीं है अभी तो आप सबको इसके लिए मिलजुल कर काम करना है प्रत्येक दिन दान और पानी की व्यवस्था करनी है। 

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जब गौरैया जल में करती है अटखेलियां

अभिप्रेरणा ग्रुप की सदस्य कादम्बनी यादव ने बताया कि जब गौरैया पानी में डूब कर लिया करती है तो यह नजारा काफी सुकून देने वाला रहता है लेकिन समय के साथ-साथ परिस्थितियों बदलती गई अब गौरैया भी काम ही नजर आते हैं और उनके लिए पानी भी नहीं बचता तो हमने गौरैया सही धन्य पक्षियों को जीवन देने के लिए यह संकल्प लिया और हम इसी की ओर आगे बढ़ रहे हैं वहीं नीलम रावटे ने बताया कि मैं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हुई कर्मचारी हम सब अलग-अलग विभागों में काम करने वाली महिलाएं हैं लेकिन हम सब ने समय निकालकर कुछ अच्छा करने का सोचा क्योंकि मैं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हूं इसलिए मैं ह्यूमन बॉडी को समझता हूं कि भीषण गर्मी में इसका क्या हाल होता है तो वह तो पक्षी है छोटी सी जान है इसीलिए उनका संरक्षण बेहद जरूरी है। वहीं व्याख्याता गायत्री साहू ने बताया कि अब राजनैतिक से लेकर धार्मिक वर्ग के लोग भी हमसे जुड़ रहे हैं, अच्छा लगता है जब आपके कार्यों को सराहना मिले और लोग स्वेच्छा से आपके साथ जुड़ते जाएं। 

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कहां से लाते हैं सकोरा...?
व्याख्याता कादम्बनी यादव ने बताया कि देवी मंदिरों से जब इन सकोरों को नदी तालाबों में विसर्जित किया जाता है तो हम इन्हें वहां से निकलवाकर गरम पानी में डूबाकर निरमा से साफ सफाई करते हैं तब जाकर ये इतना साफ हो पाता है, सभी को हम मुफ्त में वितरण कर रहे हैं, और हम विभिन्न माध्यमों से प्रोत्साहन करने की कोशिश भी कर रहे हैं कि यदि कोई पक्षियों के लिए कुछ अच्छा करते हुए अपनी सेल्फी भेजेगी तो उसे हम सम्मानित भी करते हैं क्योंकि हमारा लक्ष्य है कि लोग स्वयं से प्रेरणा ले और इस और काम करते रहें क्योंकि जीवन श्रृंखला में पक्षियों और बेजुबान जानवरों का भी अमूल्य योगदान है। 

 



 
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