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फसल बीमा के नाम पर दिए जा रहे सिर्फ 5 रुपए

Sun, 19 Jun 2016 06:33 PM IST
आलोक प्रकाश पुतुल/ रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
आलोक प्रकाश पुतुल/ रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए Updated Sun, 19 Jun 2016 06:33 PM IST
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5 rupees as compensation to the farmers on crop insurance in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के एक किसान मनोहर साय से अगर आप फसल बीमा का जिक्र करें तो वो भड़क उठते हैं। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ में रहने वाले साय ने कसम खा रखी है कि वो अब सरकार की किसी भी बीमा योजना में शामिल नहीं होंगे।

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साय कहते हैं, “अगर आपको मुआवजे के नाम पर 25 रुपए दे दिए जाएं तो क्या आप उसे बीमा मानेंगे? छत्तीसगढ़ में धान के किसानों के साथ राज्य सरकार ने यही किया है। अब इस जन्म में तो हम फसल बीमा कराने से रहे।”
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साय अकेले नहीं हैं, जो सरकार की फसल बीमा योजना से मायूस हैं। राज्य में ऐसे किसानों की संख्या हजारों में है, जिन्हें फसल बीमा के नाम पर 5 रुपए से लेकर 25 रुपए तक की रकम थमा दी गई।
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असल में 2014-15 में सरकार की मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में सरकार ने बीमा करने का जिम्मा निजी क्षेत्र की सात बीमा कंपनियों को सौंपा था।

इसके तहत राज्य के करीब 10 लाख किसानों ने फसलों का बीमा कराया। बदले में इन बीमा कंपनियों को 3 अरब 35 करोड़ रुपए से अधिक की रकम प्रीमियम के तौर पर मिली।

5 rupees as compensation to the farmers on crop insurance in Chhattisgarh

इस बीमा योजना के तहत कम या अधिक बारिश होने और फसल के बर्बाद होने पर किसानों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान था। लेकिन फसल बर्बादी के नाम पर किसानों को जो मुआवजा मिला, वह चौंका देने वाला है।

बीबीसी के पास जो सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं, उसके मुताबिक कोरिया जिले में बीमा का जिम्मा बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास था।

केवल छींदडांड़, धौराटिकरा, पटना और कंचनपुर गांवों के आंकड़ों को देखें तो इन गांवों के 3,429 किसानों को 25 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से 1 लाख 27 हजार 336 रुपए 75 पैसे का भुगतान किया गया।

यानी इस बीमा योजना में किसी किसान के पास अगर आधा एकड़ की जमीन थी, तो बीमा करने वाली बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने उस किसान को महज 5 रुपए का मुआवजा दिया।

5 rupees as compensation to the farmers on crop insurance in Chhattisgarh

कोरिया जिले के सामाजिक कार्यकर्ता रमाशंकर गुप्ता कहते हैं, “पूरे छत्तीसगढ़ में ही फसल बीमा के नाम पर प्राइवेट बीमा कंपनियों को अरबों रुपए का भुगतान कर दिया गया। किसानों के हाथ में क्या आया, यह आपको गांव-गांव में घूम कर साफ समझ में आ जाएगा।”

लेकिन राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल इन दावों से सहमत नहीं हैं।

वे इसे पूरी तरह से खारिज करते हुए कहते हैं, “छत्तीसगढ़ में ऐसा एक भी किसान नहीं है, जिसे पांच रुपए, दस रुपए या सौ रुपए का मुआवजा मिला है। जबरदस्ती किसानों को बरगलाया जा रहा है।”

हालांकि किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि राज्य बनने के बाद से ही फसल बीमा के नाम पर अंधाधुंध लूट मची हुई है। मिश्रा का दावा है कि अगर पिछले 16 सालों में लागू इस तरह की फसल बीमा योजनाओं की जांच करवा ली जाए तो कई अरब रुपए का घोटाला सामने आएगा।

आनंद मिश्रा कहते हैं, “किसानों की फसल बीमा मामले की जाच एसआईटी से करवाई जानी चाहिए। अगर सरकार यह पहल नहीं करेगी तो हम अदालत का सहारा लेंगे।”

छत्तीसगढ़ में साल 2014-15 में कुल 97,4199 किसानों ने करीब 17 लाख हेक्टेयर भूमि की फसल का बीमा कराया था, जिस पर सात बीमा कंपनियों को 3.35 अरब रुपए से ज्यादा राशि का भुगतान प्रीमियम के तौर पर किया गया था।

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