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कोरबा में 30 हाथियों ने मचाया उत्पात: धान की फसल रौंदी, दंतैल ने ग्रामीण का कच्चा मकान भी तोड़ा
Sat, 26 Sep 2026 04:25 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 26 Sep 2026 04:25 PM IST
सार
पसान रेंज में करीब 30 हाथियों के दल ने ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तक देकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। झुंड से अलग हुए 1 दंतैल हाथी ने ग्रामीण के कच्चे मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। वन विभाग ने निगरानी बढ़ाकर ग्रामीणों को सतर्क किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज में 30 हाथियों के प्रवेश करने से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी दहशत फैल गई है। केंदई, एतमानगर और जटगा रेंज से होते हुए पसान क्षेत्र के लैंगी, मोहनपुर तथा बनिया पहुंचे इन हाथियों ने खेतों में लगी धान की फसल को बुरी तरह रौंद दिया है। झुंड से अलग हुए एक दंतैल हाथी ने मोहनपुर और पोड़ीकला के बीच थुहानाला के पास एक ग्रामीण के कच्चे मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के समय गृहस्वामी परदेशी अपने परिवार के साथ घर के एक कमरे में छिपे रहे, जिससे जनहानि टल गई।
फसलों को नुकसान और मकान पर हमला
हाथियों का यह समूह पांच से अधिक स्थानों पर अलग-अलग टुकड़ियों में बंट गया है। दिन के समय फसलों को खाने के बाद रात होते ही ये दल ग्रामीण इलाकों के समीप पहुंच जाते हैं। हाथियों की इस सक्रियता के कारण किसानों की खड़ी धान की फसल नष्ट हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार बड़ा झुंड आबादी के बहुत पास आने से बचता है, किंतु झुंड से अलग होकर अकेले घूम रहे दो दंतैल हाथी सबसे अधिक खतरा बने हुए हैं। इनके लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग को इनकी निगरानी करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
चौकसी बढ़ाई, मुनादी कराई
हाथियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी है। विभाग की टीम हाथियों की मौजूदगी वाले गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क कर रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जंगलों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, हाथियों के पास न जाने और रात में अकेले खेत अथवा जंगल की ओर न जाने की सलाह दी है। विभागीय कर्मचारी हाथियों की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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अन्य क्षेत्रों में भी हाथियों का समूह
इसके साथ ही, कोरबा वनमंडल के करतला रेंज अंतर्गत बेहरसुआं क्षेत्र में नौ हाथियों का दल पहुंच गया है। यह दल पहले लबेद के आसपास विचरण कर रहा था। वहीं चिकनीपाली पहाड़ी पर नौ हाथियों का एक अन्य झुंड पहले से मौजूद है। जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में हाथियों की निरंतर उपस्थिति के कारण वन विभाग को निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
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फसलों को नुकसान और मकान पर हमला
हाथियों का यह समूह पांच से अधिक स्थानों पर अलग-अलग टुकड़ियों में बंट गया है। दिन के समय फसलों को खाने के बाद रात होते ही ये दल ग्रामीण इलाकों के समीप पहुंच जाते हैं। हाथियों की इस सक्रियता के कारण किसानों की खड़ी धान की फसल नष्ट हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार बड़ा झुंड आबादी के बहुत पास आने से बचता है, किंतु झुंड से अलग होकर अकेले घूम रहे दो दंतैल हाथी सबसे अधिक खतरा बने हुए हैं। इनके लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग को इनकी निगरानी करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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चौकसी बढ़ाई, मुनादी कराई
हाथियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी है। विभाग की टीम हाथियों की मौजूदगी वाले गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क कर रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जंगलों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, हाथियों के पास न जाने और रात में अकेले खेत अथवा जंगल की ओर न जाने की सलाह दी है। विभागीय कर्मचारी हाथियों की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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अन्य क्षेत्रों में भी हाथियों का समूह
इसके साथ ही, कोरबा वनमंडल के करतला रेंज अंतर्गत बेहरसुआं क्षेत्र में नौ हाथियों का दल पहुंच गया है। यह दल पहले लबेद के आसपास विचरण कर रहा था। वहीं चिकनीपाली पहाड़ी पर नौ हाथियों का एक अन्य झुंड पहले से मौजूद है। जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में हाथियों की निरंतर उपस्थिति के कारण वन विभाग को निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं।