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अनोखा रिवाजः एक दिन 24 घंटे देश दुनिया से कटा रहता है ये गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Mon, 05 Sep 2016 09:43 AM IST
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रोहतक के गांव खरक जाटान का अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
देश के एक गांव का अनोखा रिवाज जानकर आप चौंक जाएंगे। ये गांव पूरा एक दिन 24 घंटे के लिए देश दुनिया से कटा रहता है। इस गांव का नाम है हरियाणा में महम चौबीसी का खरक जाटान। शनिवार को 24 घंटे तक देश दुनिया के लिए बंद रहा।
सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार रात 12 बजे तक पूरे गांव को बंद रखा। न तो कोई ग्रामीण गांव से बाहर गया और न ही किसी को गांव के अंदर आने दिया गया। भादो माह के किसी भी एक शनिवार को गांव में इस बंद का आयोजन किया जाता है।
मान्यता है कि इससे पशुओं में बीमारी नहीं आती और अमन-चैन बना रहता है। गांववासी सत्यवान शर्मा, बालकिशन शर्मा, संजय, शमशेर खरक, जग्गा ठेकेदार सरपंच प्रतिनिधि, रामकुमार और पालू ने बताया कि बंद खुलने के समय पूरे गांव में गंगाजल का छिड़काव किया जाता है।
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सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों ने शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार रात 12 बजे तक पूरे गांव को बंद रखा। न तो कोई ग्रामीण गांव से बाहर गया और न ही किसी को गांव के अंदर आने दिया गया। भादो माह के किसी भी एक शनिवार को गांव में इस बंद का आयोजन किया जाता है।
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मान्यता है कि इससे पशुओं में बीमारी नहीं आती और अमन-चैन बना रहता है। गांववासी सत्यवान शर्मा, बालकिशन शर्मा, संजय, शमशेर खरक, जग्गा ठेकेदार सरपंच प्रतिनिधि, रामकुमार और पालू ने बताया कि बंद खुलने के समय पूरे गांव में गंगाजल का छिड़काव किया जाता है।
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युवाओं ने शंख बजाकर गली गली धूप की धूनी दी
हरचंदरपुर गांव
- फोटो : अमर उजाला
गांववासियों ने बताया कि इस बार बंद का आयोजन तो किया गया, लेकिन अन्य गतिविधियां नहीं हो पाई। रांझा गाने वाले कृष्ण जोगी के घर महिला की मौत होने के कारण इस बार ऐसा नहीं हो सका। लेकिन पूरे गांव ने मिलकर पूरी तरह से आस्था व विश्वास के साथ बुजुर्गों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बंद रखा।
मंदिर में खीर का प्रसाद बनाया गया। युवाओं ने शंख बजा कर पूरे गांव में गली गली घूमकर धूप की धूणी दी। सत्यवान शर्मा ने बताया कि सदियों पहले गांव में एक साधु आए थे।
उन्होंने बताया था कि भादो के किसी भी शनिवार को एक दिन के लिए बंद लगाया जाएगा तो गांव में पशुओं में बीमारी नहीं आएगी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। इस दिन एक दिन पहले बना भोजन ही करते हैं। जिस घर में दूध होता है, वह गांव में ही अन्य जरूरतमंदों को दूध दे देता है।
मंदिर में खीर का प्रसाद बनाया गया। युवाओं ने शंख बजा कर पूरे गांव में गली गली घूमकर धूप की धूणी दी। सत्यवान शर्मा ने बताया कि सदियों पहले गांव में एक साधु आए थे।
उन्होंने बताया था कि भादो के किसी भी शनिवार को एक दिन के लिए बंद लगाया जाएगा तो गांव में पशुओं में बीमारी नहीं आएगी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। इस दिन एक दिन पहले बना भोजन ही करते हैं। जिस घर में दूध होता है, वह गांव में ही अन्य जरूरतमंदों को दूध दे देता है।