गुड न्यूज, टॉय ट्रेन की वेटिंग लिस्ट से सैलानियों को निजात जल्द
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हिमाचल की वादियों की सैर करने आने वाले देशभर के सैलानियों को अब जल्द टॉय ट्रेन की वेटिंग लिस्ट से निजात मिलने वाली है। टॉय ट्रेन में कोच की संख्या बढ़ने से यात्रियों को यह सुविधा मिलेगी। कालका-शिमला रूट पर चलने वाली टॉय ट्रेन के कई कोच के पहिए खराब होने के कारण कालका स्टेशन के यार्ड में खड़े हैं। पहिए आने के बाद जल्द ही इनको ट्रेन के साथ जोड़ दिया जाएगा।
टॉय ट्रेन के लिए चितरंजन स्थित कोच फैक्ट्री से पहिए आए हैं। पहली खेप में सोलह व्हील जगाधरी वर्कशॉप में पहुंच चुके हैं। इन्हें कालका रेलवे यार्ड में खराब पड़े दो कोच में लगाया जाएगा। एक कोच में आठ पहिए लगते हैं।
हर महीने टॉय ट्रेन के लिए 40 व्हील्स आएंगे। जिन्हें यार्ड में खड़े टॉय ट्रेन के कोच में लगा दिया जाएगा और नए कोच तैयार हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में ट्रेन में कोच की संख्या बढ़ जाएगी। इससे ज्यादा सैलानी एक ट्रेन में सफर कर सकेंगे। अभी कुल छह टॉय ट्रेन हैं और एक ट्रेन में सात कोच लगे हैं।
रेल कोच फैक्ट्री जगाधरी से 16 पहिए पहुंचे
सालाना तीस करोड़ का घाटा ऐतिहासिक रेल खंड पर आय बढ़ाने के लिए रेल मंत्रालय मंथन कर रहा है, लेकिन पटरी पर उतारने के लिए कोच नहीं हैं। आलम यह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रही है। कोच में व्हील की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। कालका वर्कशॉप और स्टेशन की वाशिंग लाइन में कई कोच लगे हैं। ऐसी स्थित में सालाना करीब तीस करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
व्हील आए पर साइज ठीक नहीं
कालका की वर्कशॉप में चितरंजन (पश्चिम बंगाल) की रेल कोच फैक्ट्री के साथ ही कानपुर की एक निजी कंपनी व्हील सप्लाई करती है। इस वर्कशॉप में व्हील काफी हैं। साइज में गड़बड़ी के कारण उनको कोच में नहीं लगाया जा सका। जब यह बात नार्दर्न रेलवे के जीएम तक पहुंची तो उन्होंने इनकी जांच करने के लिए चितरंजन की तकनीकी टीम को बुलाया। तकनीकी टीम की रिकमंडेशन के आधार पर नए व्हील तैयार किए गए।
नीरज शर्मा, सीपीआरओ, नार्दर्न रेलवे ने बताया कि पश्चिम बंगाल स्थित चितरंजन रेल कोच फैक्ट्री से जगाधरी 16 पहिए पहुंच चुके हैं। प्रत्येक माह 40 व्हील इसी फैक्ट्री से आएंगे। कानपुर की रेल कोच फैक्ट्री से व्हील के लिए बातचीत चल रही है। इस पर भी जल्द फैसला किया जाएगा।