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एचएमटी कर्मियों को वीआरएस से फायदा कम और नुकसान ज्यादा, जानिए कैसे?

Mon, 07 Nov 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Mon, 07 Nov 2016 02:05 AM IST
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HMT employee's loss more than profit in VRS
एचएमटी

एचएमटी कंपनी के ट्रैक्टर यूनिट मे कार्यरत कर्मचारियों को वीआरएस से संबंधित नोटिस जारी कर दिया गया है। वीआरएस लेने से कर्मचारियों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। ऐसी स्थिति में यदि कर्मचारी वीआरएस नहीं लेते हैं तो उन्हें वीएसएस स्कीम के तहत कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा जाएगा। 

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इसके अलावा यदि कर्मचारी वीआरएस लेते हैं तो स्कीम का फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। वीआरएस लेने से उन्हें कई भत्ते नहीं मिलेंगे। केंद्रीय सरकार ने पिंजौर स्थित एचएमटी कंपनी के ट्रैक्टर यूनिट को बंद करने का निर्णय लेने के बाद वीआरएस से संबंधित स्कीम का नोटिस जारी कर दिया गया था। 
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वीआरएस स्कीम के तहत जो कर्मचारियों 30 ज्यादा नौकरी कर चुका है उसे  अधिकतम 5 साल शेष बची सर्विस का फायदा ही मिलेगा। इसका मतलब हुआ कि जिसकी सर्विस 5 साल से अधिक बची है, उन्हें सीधे तौर पर 5 साल का ही फायदा दिया जाएगा। 
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पांच साल से ज्यादा शेष बची सर्विस का कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस स्कीम के तहत उन कर्मचारियों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जिनकी सर्विस को अभी 30 साल पूरे नहीं हुए हैं।

बीआरएस लेने पर कई भत्ते कर्मचारियों को नहीं मिलेंगे

HMT employee's loss more than profit in VRS
एचएमटी

वहीं, वीआरएस के लिए आवेदन नहीं करने वाले कर्मचारियों को कंपनी मैनेजमेंट की ओर से इंडस्ट्रियल कंपनी डिस्प्यूट एक्ट 1947 के तहत कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। सही मायनों में कहा जाए तो कर्मचारियों को वीआरएस के लिए आवेदन करना उनकी मजबूरी है, क्योंकि उनके लिए अन्य कोई रास्ता शेष नहीं बचा है।

इसके अलावा वीआरएस के तहत पांच साल या पांच साल से कम बची सर्विस का वेतन एकमुश्त मिलने पर उस सैलरी पर  लगने वाले टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी हो जाएगी। पहले हर साल आय कम होने पर आयकर देने का स्लैब कम होता था।

इसके अलावा हर साल कर्मचारी सेविंग करके आयकर में छूट भी प्राप्त कर लेते थे। वहीं अब एक साथ सैलरी मिलने पर सालाना आय बढ़ जाएगी, जिस पर कर्मचारियों को 30 प्रतिशत की दर से आयकर देना होगा। इसके अलावा धारा 80सी के तहत अधिकतम सालाना सेविंग डेढ़ लाख तक ही की जा सकती है। इस कारण उन्हें सेविंग का भी कम फायदा मिलेगा। 

टैक्सेशन एक्सपर्ट संजय जांगड़ा का कहना है कि वीआरएस स्कीम के तहत 2007 के पे स्केल पर मूल वेतन और महंगाई भत्ता ही मिलेगा। जबकि शेष बची सर्विस पर कंपनी से प्राप्त होने वाले विभिन्न भत्तों का फायदा नहीं मिलेगा। इसके अलावा शेष बची सर्विस पर पीएफ और ग्रैज्युटी भी नहीं मिलेगी। इस कारण कर्मचारियों को सीधे तौर पर एक से दो लाख रुपये का सालाना नुकसान होगा।

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