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चिंता मनी-45: टैक्स बचत वाले म्यूचुअल फंड्स क्या हैं
Sat, 03 Oct 2020 02:34 AM IST
नारायण कृष्णमूर्ति
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
Published by: नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Sat, 03 Oct 2020 02:34 AM IST
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निवेश
- फोटो : pixabay
वेतनभोगी करदाताओं के लिए आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत मिलने वाली टैक्स छूट ऐसी चीज है, जिस पर हर साल नजर डालने की जरूरत पड़ती है। लखनऊ में रहने वाले 38 साल के महेश सरन पिछले 15 साल से अपने पिता के आदेश का पालन करते हुए अपने नियोक्ता द्वारा दिए गए पीएफ में अंशदान के अलावा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की कई पॉलिसियों तथा पीपीएफ में निवेश करते हैं। हाल के महीनों में अपनी टैक्स बचत योजनाओं का मूल्यांकन करते हुए उन्होंने पाया कि ये बचत उतनी भी बड़ी नहीं हैं, जितना कि उन्होंने सोचा था। उन्होंने ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स के बारे में सुना था, इसलिए यह जानना चाहते हैं कि टैक्स बचत योजना के तौर पर ये कितने कारगर हैं।
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धारा 80 सी के तहत टैक्स बचत करदाताओं को बचत के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने उन्हें एक अवसर प्रदान किया है, जिसके तहत हर वित्त वर्ष में कुछ योजनाओं में 1.5 लाख तक का निवेश करने पर टैक्स बचत हो सकती है। ये योजनाएं हैं-पीएफ, पीपीएफ, जीवन बीमा के प्रीमियम, पांच साल की बैंक एफडी में निवेश, बच्चों की शिक्षा पर खर्च (दो बच्चों तक), होम लोन के मूलधन का भुगतान, ईएलएसएस और एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम)।
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ईएलएसएस क्या है?
ईएलएसएस किसी भी दूसरे म्यूचुअल फंड्स की तरह है, जो जमाराशि के 80 फीसदी हिस्से को शेयर बाजार में और बाकी के हिस्से को डेब्ट फंड में निवेश करता है। ईएलएसएस में सबसे कम तीन साल का लॉक-इन पीरियड रहता है, जबकि यह ऐसा अकेला फंड है, जिसमें इक्विटी आवंटन सबसे अधिक होता है। अलबत्ता पीएफ, पीपीएफ या बैंक एफडी की तरह ईएलएसस में कोई गारंटेड रिटर्न नहीं होता। लेकिन अपने कम लॉक-इन पीरियड तथा मार्केट-लिंक्ड रिटर्न्स के कारण इसका रिटर्न एफडी, पीपीएफ, यहां तक कि पीएफ से भी अधिक होता है। ज्यादातर बचत योजनाओं में विविधता नहीं होती। जैसे, पीपीएफ खाता आप चाहें बैंक में खोलें या पोस्ट ऑफिस में, वह एक ही होता है, आप चाहे टीसीएस में नौकरी करें या पंजाब नेशनल बैंक में पीएफ रिटर्न बराबर ही होता है। लेकिन 40 से अधिक म्यूचुअल फंड कंपनियां आपको ईएलएसएस ऑफर करती हैं। ऐसे में, आपके पास ईएलएसएस की ऐसी योजना चुनने का विकल्प है, जो लंबी अवधि में आपको बेहतर रिटर्न दे। अगर आप थोड़ा खतरा उठाना चाहें, तो ईएलएसएस इक्विटी मार्केट में आपका पहला निवेश बन सकता है।
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सुझाव
यह एक विद्रूप ही है कि जब बैंक का एप डाउनलोड करने या किराने का सामान खरीदने के लिए नई टेक्नोलॉजी अपनाने की बात होती है, तब युवा पहल करते हैं। लेकिन जब निवेश करने की बात होती है, तब यही युवा अपने माता-पिता की सलाह लेते हैं। बुजुर्गों से सलाह लेने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अपने उन बुजुर्गों से वित्तीय फैसले लेने की गलती न करें, जिन्हें अपनी बैंक डिपॉजिट्स पर भारी रिटर्न मिला है। वे दिन बीत चुके हैं और मार्केट लिंक्ड रिटर्न आज की हकीकत है। महेश को पहले ईएलएसएस में निवेश करना चाहिए, फिर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में भी हाथ आजमाना चाहिए। ईएलएसएस में चूंकि तीन साल का लॉक-इन रहता है, ऐसे में, हर साल टैक्स बचत के लिए पैसा की चिंता करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। जैसे-टैक्स बचत के लिए 1.5 लाख के निवेश में से पीएफ के अंशदान के बाद बची एक लाख की राशि का ईएलएसएस में तीन साल तक निवेश किया जा सकता है। चौथे साल में, जब आपके पहले साल के ईएलएसएस का लॉक-इन पीरियड पूरा हो जाता है, तब आप यह राशि निकाल सकते हैं, जो एक लाख से अधिक ही होगी। इस तरह चौथे साल में टैक्स बचत में निवेश करने के लिए आपको पैसे का अलग से इंतजाम नहीं करना पड़ेगा।