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IL&FS संकटः प्रोविडेंट फंड के हजारों करोड़ रुपए पर मंडरा रहा खतरा, ट्रस्टों में घबराहट

Thu, 14 Feb 2019 03:38 PM IST
अजय सिंह बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अजय सिंह Updated Thu, 14 Feb 2019 03:38 PM IST
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Trusts of IL and FS company in panic due to Crores of Provident funds in danger
आईएल एंड एफएस
करोड़ों के कर्ज में डूबे हुए IL&FS समूह में निवेश किए गए पेंशन और प्रोविडेंट फंड के हजारों करोड़ रुपए पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। कई प्रोविडेंट और पेंशन फंड ट्रस्टों ने लाखों मध्यवर्गीय वेतनभोगियों के पेंशन और प्रोविडेंट फंड का पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज में निवेश किया है। इन कंपनियों ने बकाए की वापसी की प्रक्रिया पर चिंता जाहिर करते हुए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट में याचिका दायर की है और जल्द से जल्द दखल देने की मांग की है।
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हालांकि निवेश की सही-सही रकम का अंदाजा नहीं लग सका है, लेकिन निवेश बैंकरों के मुताबिक यह रकम 15 से 20 हजार करोड़ रुपए मानी जा रही है। उनका मानना है कि यह रकम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बॉन्ड्स में लगी है, जो उस वक्त ‘एएए’ कैटेगरी में थे और उस वक्त रिटायरमेंट फंड्स की पहली पसंद थे, क्योंकि ब्याजदर कम होने के बावजूद उन पर सुनिश्चित रिटर्न मिलता है।
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सूत्रों के मुताबिक याचिका दायर करने वाली कंपनियों में पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के फंड्स का प्रबंध करने वाले ट्रस्ट हैं जिनमें एमएमटीसी, इंडियन ऑयल, सिडको, हुडको, आडीबीआई, एसबीआई और हिमाचल प्रदेश गुजरात इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड प्रमुख हैं। इनके अलावा प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां हिन्दुस्तान यूनिलीवर और एशियन पैंट्स भी शामिल हैं।अपनी याचिकाओं में इन कंपनियों ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) की धारा 53 पर सवाल उठाए हैं। आईबीसी की धारा-53 के तहत बिक्री का बंटवारा वाटरफाल सिस्टम से किया जाता है। इस धारा के तहत सबसे पहले बड़े और सुरक्षित कर्जदाताओं का पैसा चुकाया जाता है और शेष राशी अनुषंगी कर्जदाताओं को जाती है। आखिर में इक्विटी धारकों को इसका भुगतान किया जाएगा।
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माना जा रहा है कि याचिका दायर करने की अंतिम तिथि 12 मार्च है। अब तक कई प्रोविडेंट फंड कंपनियां सामने आ चुकी हैं और जल्द ही बाकियों के शामिल होने की भी उम्मीद है। माना जाता है कि IL&FS के संपर्क में अभी तक 14 लाख कर्मचारियों के सेवानिवृत लाभ का प्रबंध करने वाले 50 से ज्यादा फंड शामिल हैं।

IL&FS समूह में 302 कंपनियों में से 169 भारतीय कंपनियां शामिल हैं और IL&FS ने इन्हें 3 श्रेणीयों ग्रीन, एंबर और रेड में बांटा है। जिनमें 22 कंपनियों (ग्रीन) की पहचान उनके सभी दायित्वों को पूरा करने की स्थिति में की गई है, वहीं एंबर मार्क वाली 10 कंपनियां सुरक्षित लेनदारों को पैसे वापस कर सकती हैं, जबकि 38 कंपनियों को रेड कैटेगरी में रखा गया है जो अपने दायित्वों को पूरा करने में अक्षम हैं। साथ ही कंपनी का कहना है कि 100 और संस्थाओं का अभी आकलन किया जा रहा है। इन कंपनियों की चिंता है कि अगर केवल सुरक्षित लेनदारों का बकाया वापस किया जाएगा, तो उनमें केवल बैंक ही शामिल होंगे और बाकी बॉन्डधारकों को बकाया रकम नहीं मिलेगी।


गौरतलब है कि IL&FS समूह पर 90 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है। वहीं इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बैंक ऑफ इंडिया की 50.5 प्रतिशत और यूटीआई की हिस्सेदारी 30.5 प्रतिशत है। वहीं एलआईसी की 26.01 प्रतिशत, जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन की 23.54  प्रतिशत, आबूधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 12.5  प्रतिशत, एचडीएफसी 9.02 प्रतिशत और एसबीआई की 6.42 प्रतिशत हिस्सेदारी है।   
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