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तेल आयात खर्च में 1.84 लाख करोड़ की बढ़ोतरी: खाड़ी देशों में दागी गई हर मिसाइल का खर्च सीधा आपसे जुड़ा, कैसे?
Sat, 29 Aug 2026 10:06 AM IST
द बोनस
बोनस डेस्क।
बोनस डेस्क।
Published by: द बोनस
Updated Sat, 29 Aug 2026 10:06 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
अगर आपको लगता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का विषय है, तो अपनी सोच को बदल लीजिए। खाड़ी देशों में दागी गई हर मिसाइल और समुद्र में फंसे हर तेल टैंकर का सीधा बिल आपकी जेब, रसोई के बजट और मासिक बचत से कटता है।
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सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के ताजा विश्लेषण के अनुसार, मार्च से अगस्त 2026 के छह महीनों में होर्मुज संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आए उछाल ने भारत के ईंधन (कच्चा तेल, गैस व एलएनजी) आयात बिल में 22 अरब डॉलर यानी करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़ दी है।
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शुद्ध रूप से यह बोझ 14.4 अरब डॉलर (करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये बैठता है, जो देश की कुल जीडीपी के 0.38 फीसदी या 1.4 दिन की राष्ट्रीय आय के बराबर है। यूरोपीय संघ (78 अरब डॉलर) और चीन (35 अरब डॉलर) के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा प्रभावित आयातक देश है।
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अकेले कच्चे तेल पर ही भारत को 20.5 अरब डॉलर अतिरिक्त चुकाने पड़े, क्योंकि इस दौरान ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 93 डॉलर प्रति बैरल रहा, जो 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद से तेल की कीमतों में आया सबसे लंबा और मजबूत झटका है।
क्या फिर से बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम
यदि संकट लंबा खिंचता है, तो कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए खुदरा बाजार में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर की चरणबद्ध मूल्य वृद्धि सरकार की मजबूरी बन सकती है। यदि क्रूड 95 से डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो कीमतों में फेरबदल करने का दबाव तेजी से बढ़ेगा।