सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से 90 हजार करोड़ वसूलने की तैयारी
लगातार डिफाल्ट से मुश्किल में फंसी सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से 90 हजार करोड़ की कर्ज वसूली पर ऋणदाता सोमवार को मंथन करेेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक की अगुवाई वाले 30 कर्जदाताओं का समूह बैठक के दौरान कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलने पर विचार कर सकता है।
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कर्जदाता समूह इस कंपनी में सबसे बड़ा शेयरधारक बनने के लिए कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलने पर चर्चा करेगा। यह योजना आरबीआई के एनपीए पर जारी संशोधित सर्कुलर को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है।
नए सर्कुलर के तहत बैंकों को डिफाल्ट के 30 दिन के भीतर कर्ज पुनर्गठन की सुविधा मिलती है। डीएचएफएल के प्रर्वतकों के समूह यानी वाधवान परिवार के पास कंपनी की 39 फीसदी हिस्सेदारी है और यह समूह पिछले एक साल से कंपनी से बाहर निकलने की तैयारी में है। उन्होंने कई बार समूह कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की और सूचीबद्ध कंपनियों में अपनी आधी हिस्सेदारी छोड़ने की भी बात कही है।
आरबीआई कर चुका है आलोचना
रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों कहा था कि डीएचएफएल जैसी कंपनियों में संपत्ति देयता काफी बेमेल है, जो उनके वित्तीय मुश्किलों में फंसने का सबसे बड़ा कारण है। ये कंपनियां लंबी अवधि की पूंजी जुटाने के लिए छोटी अवधि के कर्ज उठाती हैं, जो काफी बेमेल है। इसके अलावा कई रेटिंग एजेंसियों ने भी कंपनी की रेटिंग घटा दी है, जिसका असर शेयर बाजार में कंपनी के निवेशकों पर भी होने लगा है।