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नोटबंदी के समय असामान्य नकद बिक्री की होगी जांच

Fri, 24 Feb 2017 04:04 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 24 Feb 2017 04:04 PM IST
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income tax department launches drive on shopkeepers whose sales surge during demonetisation
नोटबंदी के बाद संदिग्ध नकदी जमाओं की जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आयकर विभाग अब कर चोरी का पता लगाने के लिए ऐसी कारोबारी इकाइयों की जांच में जुट गया है, जिन्होंने नवंबर व दिसंबर महीनों में नकद बिक्री में असामान्य वृद्धि दर्ज की है।
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि नकद बिक्री में हुई असामान्य वृद्धि के हर मामले में आयकर विभाग किसी भी कंपनी, उद्यम या व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदर्शित की गई बिक्री और इनवेंटरी के आंकड़ों का मिलान पीछे के महीनों की बिक्री व इनवेंटरी आंकड़ों से करेगा और यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि कहीं काले धन को तो बिक्री बनाकर नहीं दिखाया जा रहा है।
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ऐसे दुकानदारों पर है कड़ी निगाह

income tax department launches drive on shopkeepers whose sales surge during demonetisation
कर अधिकारियों की निगाह ऐसे व्यापारियों और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर है, जिन्होंने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा होने के बाद अचानक नकद बिक्री या इनवेंटरी खरीद में बढ़ोतरी दिखाई है।

अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कारोबारी इकाइयों ने बिक्री में बढ़ोतरी या इनवेंटरी खत्म करने का दावा किया है और पहले से अधिक कर (वैट व उत्पाद शुल्क) जमा कराए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटबंदी के तत्काल बाद सांविधिक बकायों के भुगतान में चलन से हटाए गए नोटों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। आयकर विभाग यह पता लगाएगा कि प्रदर्शित किया गया नकद लेन-देन एक खास अवधि में हुए सामान्य कारोबार से मेल खाता है या नहीं।

इसके लिए कर अधिकारी मासिक बिक्री का समरी देखेंगे। इसे नकद और क्रेडिट में हुई बिक्री को अलग-अलग करके देखा जाएगा और साथ ही पहले के बैंक स्टेटमेंट भी देखे जाएंगे। इसके बाद नकदी की बैक-डेटिंग या झूठी बिक्री दर्ज करने के मामलों का पता लगाया जाएगा।
 

काले धन को सफेद करने पर नजर

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अधिकारी ने कहा कि इस कवायद का मकसद उन सबको पकड़ना है, जिन्होंने चलन से हटाए गए पुराने नोटों को जमा करने के लिए दी गई 50 दिनों की मोहलत अवधि में कारोबारी इकाई की आड़ में अपने काले धन को सफेद किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की भी जांच होगी, जिसमें किसी प्रतिष्ठान के पास नकदी जमा करने के बाद बैंक खातों से रकम हस्तांतरित की गई हो। अधिकारी ने कहा कि नकदी में दिए गए डोनेशन की भी जांच होगी।

कारोबारी इकाई भी ले सकते हैं एमनेस्टी योजना का लाभ

अधिकारी ने बताया कि एक आम आदमी की तरह कोई कंपनी, पार्टनरशिप या प्रोपराइटरशिप भी कर एमनेस्टी योजना ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ (पीएमजीकेवाई) का लाभ ले सकता है।

वे काले धन की घोषणा कर सकते हैं, 50 फीसदी तक कर का भुगतान कर सकते हैं, कुल राशि का एक चौथाई हिस्सा चार साल के लिए शून्य ब्याज की दर पर जमा कर सकते हैं और एमनेस्टी का दावा कर सकते हैं। 
 
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