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सरसों की कीमत: मंडियों में सरसों की आवक सुस्त, खरीदारी तेज होने से भाव 9,150 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे

Thu, 03 Sep 2026 05:21 PM IST
कुमार विवेक द बोनस डेस्क, नई दिल्ली
द बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 03 Sep 2026 05:21 PM IST
सार

देश की मंडियों में सरसों की आवक सुस्त होने और तेल मिलों की मजबूत मांग से भाव ₹9,150 प्रति क्विंटल तक पहुंचे। जानिए उत्पादन अनुमान में 7 लाख टन की कटौती और मंडियों के ताजा समीकरण।

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Mustard prices rise to ₹9,150/quintal as production estimates drop by 7 lakh tonnes
सरसों तेल - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देशभर की प्रमुख कृषि मंडियों में सरसों की कीमतों में एक बार फिर जबर्दस्त मजबूती देखने को मिल रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्पादक क्षेत्रों से आवक कमजोर रहने और तेल मिलर्स व स्टॉकिस्टों की सक्रिय खरीदारी के चलते भावों को मजबूत सहारा मिला है। राजस्थान की प्रमुख भरतपुर मंडी में 24 अगस्त को 7,900 रुपये प्रति क्विंटल पर खुला भाव चढ़कर 1 सितंबर को 8,001 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। वहीं जयपुर मंडी (42 फीसदी कंडीशन) में भाव 75 रुपये की दैनिक तेजी के साथ 8,425 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। 

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प्रमुख मंडियों में सरसों का भाव (रुपये प्रति क्विंटल)

मंडी  24 अगस्त 2026 1 सितंबर 2026
भरतपुर 7,900 8,001
जयपुर (42% कंडीशन) 8,375 8,425
दिल्ली (42% कंडीशन) 8,150 8,200
चरखी दादरी 8,400 8,500
आगरा सलोनी खरीदारी नहीं 9,150

उत्पादन में 7 लाख टन की कमी 

मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी और आईग्रेन इंडिया के ताजा अनुमानों के मुताबिक, फसल वर्ष 2024-25 में देश का कुल सरसों उत्पादन 117.25 लाख टन आंका गया था। हालांकि 1 अगस्त 2026 को इसमें 7 लाख टन की सीधी कटौती की गई, जिससे कुल फसल का संशोधित अनुमान घटकर 110.25 लाख टन रह गया है।

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राज्यवार उत्पादन के लिहाज से राजस्थान 54.25 लाख टन के साथ शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश 19 लाख टन, पंजाब/हरियाणा 13.5 लाख टन, मध्य प्रदेश 13 लाख टन, पश्चिम बंगाल व पूर्वी भारत 12.5 लाख टन और गुजरात 5 लाख टन के स्तर पर हैं। 3 लाख टन की शुरुआती आवक घटाने और 4 लाख टन के पुराने कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक को जोड़ने के बाद देश में कुल विपणन योग्य अधिशेष 111.25 लाख टन बैठता है।

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आवक की रफ्तार धीमी 

मार्च 2026 से अगस्त 2026 के छह महीनों में मंडियों में कुल अनुमानित आवक 78.5 लाख टन रही है। आवक के मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पीक सीजन (मार्च में 19 लाख टन और अप्रैल में 20 लाख टन) के बाद आवक में तेज गिरावट आई है। मई में यह 15.5 लाख टन, जून में 10 लाख टन, जुलाई में 7 लाख टन और अगस्त में घटकर महज 6.5 लाख टन रह गई।

तेल मिलों की पेराई मजबूत 

मार्च-अगस्त में कुल पेराई 69 लाख टन रही। (मार्च में 15 लाख टन, अप्रैल में 16 लाख टन, मई में 13 लाख टन, जून में 9 लाख टन, जुलाई में 8 लाख टन और अगस्त में 8 लाख टन)। 78.5 लाख टन की कुल आवक के मुकाबले 69 लाख टन माल पहले ही पेरा जा चुका है, यानी मिलों ने लगभग 88 फीसदी आई हुई आवक खपा ली है। इस वजह से भी सरसों की कीमतों को सहारा मिल रहा है।

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